अमेरिका जैसी परमाणु ताकत के करीब चीन? ड्रैगन के न्यूक्लियर जखीरे से घबराया वॉशिंगटन, टेंशन में ट्रंप

Updated on 24-02-2026 01:48 PM
जेनेवा: अमेरिका ने चीन अपने परमाणु हथियारों के जखीरे को बहुत ज्यादा मात्रा में बढ़ाने का आरोप लगाया है। इसके साथ ही दावा किया है कि बीजिंग पर गुप्त रूप से परमाणु परीक्षण किए हैं। इसके साथ ही वॉशिंगटन ने बीजिंग से भविष्य में होने वाली हथियार नियंत्रण संधि में शामिल होने की अपील की। वॉशिंगटन ने कहा कि इस महीने की शुरुआत में अमेरिका और रूस से न्यू START संधि के खत्म होने से बेहतर समझौते की संभावना बनी है, जिसमें बीजिंग भी शामिल हो। अमेरिका के आर्म्स कंट्रोल और नॉनप्रोलिफरेशन के असिस्टेंट सेक्रेटरी ऑफ स्टेट क्रिस्टोफर येव ने जेनेवा में डिसआर्मामेंट पर सम्मेलन में बोलते हुए यह बात कही है।

सम्मेलन में बोलते हुए येव ने न्यू स्टार्ट संधि में कई बड़ी कमियां बताईं। उन्होंने कहा कि New START की शायद इसकी सबसे बड़ी कमी यह थी कि इसने चीन द्वारा पहले कभी नहीं किए गए, जानबूझकर, तेजी से और बिना देखे परमाणु हतियार बनाने का ध्यान नहीं रखा। उन्होंने कहा कि चीन ने अपने दावों के उलट, जानबूझकर और बिना किसी रोक-टोक के, बिना किसी पारदर्शिता या चीन के इरादे या आखिरी बिंदु के किसी भी संकेत के बिना अपने परमाणु हथियारों का जखीरा बहुत ज्यादा बढ़ाया है।

5 साल में अमेरिका की बराबरी करेगा चीन

येव ने चेतावनी दी कि बीजिंग अगले चार या पांच सालों में बराबरी पर पहुंच सकता है। साथ ही यह भी दावा किया कि चीन 2030 तक 1000 से ज्यादा न्यूक्लियर वॉरहेड के लिए काफी फिसाइल मटीरियल रखने की राह पर है। इसी कॉन्फ्रेंस में चीनी राजदूत शेन जियान ने कॉन्फ्रेंस में अमेरिकी आरोपों को पर सख्त ऐतराज जताया। जियान ने कहा कि उनका देश कुछ देशों द्वारा अपनी न्यूक्लियर पॉलिसी को लगातार तोड़-मरोड़कर पेश करने और बदनाम करने का कड़ा विरोध करता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि बीजिंग किसी भी देश के साथ न्यूक्लियर हथियारों की रेस में शामिल नहीं होगा।

क्या है New START संधि?

अमेरिका और रूस के बीच न्यू स्टार्ट ट्रीटी ने दोनों देशों को 1550 न्यूक्लियर वॉरहेड की तैनाती तक सीमित कर दिया था। बीती 5 फरवरी को यह संधि खत्म हो गई। इसके खत्म होने से दशकों में पहली बार ऐसा हुआ है, जब दुनिया के सबसे ज्यादा हथियार रखने वाले देशों के बीच न्यूक्लियर हथियारों की पोजीशनिंग को रोकने के लिए कोई संधि नहीं है। इससे हथियारों की नई रेस की चिंता बढ़ गई है।
अमेरिकी असिस्टेंट सेक्रेटरी येव ने संधि के खत्म का बचाव किया और कहा कि रूस के कथित उल्लंघनों को देखते हुए इसकी संख्या की सीमा अब जरूरी नहीं थी। उन्होंने दावा किया कि बीजिंग के अपने हथियारों का साइज बढ़ाने में मॉस्को ने मदद की थी। येव ने कहा कि संधि का खत्म होना एक अच्छे समय पर हुआ और इससे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को एक बेहतर समझौते के अपनी आखिरी लक्ष्य को पूरा करने का मौका मिलेगा।

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