PAK की बजाय अब अफगानिस्तान में मौका देख रहा भारत को ये प्रोजेक्ट मंजूर नहीं

Updated on 08-12-2023 02:00 PM

चीन ने अफगानिस्तान की सत्ता पर कब्जा कर चुके तालिबान के नामित अधिकारी को हाल ही राजनयिक दर्जा दे दिया है। हालांकि इसको लेकर चीन ने सफाई भी है।

चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता वांग वेनबिन ने कहा- हमारा मानना है कि अफगानिस्तान के लंबे समय से अच्छा पड़ोसी है। ऐसे में अफगानिस्तान को अंतरराष्ट्रीय समुदाय से बाहर नहीं किया जाना चाहिए।

इससे पहले चीन ने तालिबान को कर्जजाल वाली बेल्ट एंड रोड परियोजना (BRI) के लिए आयोजित फॉरम में भी बुलाया था। एक्स्पर्ट्स का कहना है ​कि लंबे समय से चीन की नजर अफगानिस्तान के खनिज संसाधनों पर है। इसके साथ ही व​ह पाकिस्तान में चल रहे संघर्ष और वहां चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) की परियोजनाओं के विरोध के चलते परेशान है। इसी कारण वह पाकिस्तान से आगे अफगानिस्तान में संभावनाएं देख रहा है।

लंदन में रॉयल यूनाइटेड सर्विसेज इंस्टीट्यूट में सीनियर एसोसिएट फेलो रैफेलो पेंटुची के मुताबिक बेल्ट एंड रोड फोरम में तालिबान का शामिल होना बताता है कि वह निवेश में आगे बढ़ चुका है। यह भी कहा जा रहा है कि BRI के CPEC के तहत कुछ परियोजनाओं में अफगानिस्तान को लाने की बात चल रही है।

CPEC में कई इंफ्रा प्रोजेक्ट हैं, जो अरब सागर तक जाते हैं
तालिबान ने लगातार BRI में भागीदारी की इच्छा जताई है। तालिबान के साथ चीन इसलिए भी आगे बढ़ना चाहता है कि पाकिस्तान में मौजूद तालिबान के दूसरे धड़े ने चीन की बेल्ट एंड रोड परियोजना को लेकर चेतावनी दी है कि सरकार या तो निर्माण की लागत का 5% भुगतान करे वर्ना 3200 किलो लंबे चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे को तबाह कर देगा। इसमें रेलवे समेत कई इंफ्रा प्रोजेक्ट हैं, जो अरब सागर तक जाते हैं।

परियोजनाओं में अफगानिस्तान को लाने की बात चल रही है। तालिबान ने लगातार बीआरआई में भागीदारी की इच्छा जताई है। तालिबान के साथ चीन इसलिए भी आगे बढ़ना चाहता है कि पाकिस्तान में मौजूद तालिबान के दूसरे धड़े ने चीन की बेल्ट एंड रोड परियोजना को लेकर चेतावनी दी है कि सरकार या तो निर्माण की लागत का 5% भुगतान करे वर्ना 3200 किलो लंबे चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे को तबाह कर देगा। इसमें रेलवे समेत कई इंफ्रा प्रोजेक्ट हैं, जो अरब सागर तक जाते हैं।

BRI में तालिबान के शामिल होने से आतंकवाद और बढ़ने का खतरा
चीन की तालिबान को BRI के विस्तार में शामिल करने की मंशा के कई पहलू हैं। पहला- वह वहां लंबे समय से निवेश करने वाले भारत का प्रभाव कम करना चाहता है। अगर तालिबान उसके कर्जजाल में फंस गया तो निश्चित ही भारत के लिए चिंता की बात है।

भारत ने अफगानिस्तान में बिजली, पानी, सड़क जैसी परियोजनाओं में निवेश किया है, जिसका फायदा जनता को होता है। पर चीन सीधे शासकों का फायदा पहुंचाता हैं। डर है कि चीनी पैसा तालिबानी शासकों के हाथ जाएगा, जो आर्थिक तौर पर मजबूत होंगे। इससे पाकिस्तान में आतंकी वारदात बढ़ने की आशंका है। आंच भारत पर भी आ सकती है।

दूसरा- पाकिस्तानी सेना या सरकार की सहमति के बगैर चीन इस परियोजना को अफगानिस्तान शिफ्ट नहीं कर सकता। इसके बदले में चीन से पाकिस्तान कहेगा कि तालिबान से बेहतर रिश्ते कराने में मदद करे।

तीसरा- BRI के अफगानिस्तान में विस्तार से अमेरिका को परेशानी होगी। आखिरी बात ये है कि चीन से अफगानिस्तान के लोगों को कोई फायदा नहीं होगा। चीन निर्माण में अपने ही लोगों को काम देता है, जिन्हें चीन की जेलों तक से भेजा जाता है।


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