
इंदौर को न सिर्फ अपने खान-पान, स्वच्छता के लिए जाना जाता है, बल्कि ये सामाजिक सरोकारों में भी आगे रहता है। जब बात इंदौर के विकास की आती है तो सामाजिक संगठन बढ़-चढ़कर भागीदारी करते हैं। बात इंदौर में नर्मदा लाने की हो या कान्ह-सरस्वती नदी को साफ करने की, हर क्षेत्र में संगठन-समाज आगे रहते हैं। इसका उदाहरण पिछले दिनों भारतीय रेलवे बोर्ड के चेयरमैन अनिल लाहोटी की इंदौर यात्रा के दौरान भी दिखा। इंदौर में रेल सुविधाएं बढ़ाने के लिए जनप्रतिनिधि, नेताओं के साथ ही अभ्यास मंडल और माहेश्वरी समाज भी मांगें लेकर पहुंच। समाज ने लाहोटी जी से महेश नवमी के कार्यक्रम में पधारने का निवेदन करने के साथ ही इंदौर को रेल सुविधाएं प्रदान करने में प्राथमिकता देने का विशेष आग्रह भी किया।
भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय इन दिनों इंदौर के स्थानीय मामलों में खासा हस्तक्षेप कर रहे हैं। बंगाल का प्रभारी रहने के दौरान वे इंदौर से कट गए थे। पिछले दिनों वे नाइट कल्चर को लेकर एक बैठक में भी शामिल हुए थे। उन्होंने नाइट कल्चर का जमकर विरोध किया है। वैसे ये आपदा प्रबंधन की बैठक थी, इसमें विजयवर्गीय किस हैसियत से शामिल हुए थे, इस पर भी सवाल उठ रहे हैं। इन सबके बीच राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि विजयवर्गीय प्रदेश और इंदौर की राजनीति में अपना पुनर्वास कराने की तैयारी में हैं। इसी कारण वे इंदौर के मामलों में इनती रुचि ले रहे हैं। वे लगातार बयानबाजी भी इसी परिप्रेक्ष्य में कर रहे हैं। कुछ लोग कह रहे हैं कि वे अगले विधानसभा चुनाव में बड़ी भूमिका में नजर आना चाहते हैं।
भाजपा में इन दिनों काफी उठापटक देखने को मिल रही है। ऐन चुनाव के पहले कलह रोक पाना भाजपा के लिए टेढ़ी खीर साबित हो रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री कैलाश जोशी के पुत्र और पूर्व मंत्री दीपक जोशी का कांग्रेस में शामिल होना लगभग तय है। इसके बाद और भी कई नेता भाजपा से नाता तोड़ने का मन बना चुके हैं। दीपक जोशी के भाजपा छोड़ने पर इंटरनेट मीडिया पर कई संदेश चल रहे हैं। कोई कह रहा है कि जिस पार्टी ने जोशी परिवार को पहचान दी आज उसी का दीपक दूसरी पार्टी को रोशन करने जा रहा है। एक यूजर ने लिखा कि ‘दीपक’ का बुझना अनुष्ठान में शुभ नहीं होता है! अब लोग इसे विधानसभा चुनाव में भाजपा का दीपक बुझने से जोड़कर देख रहे हैं।
इंदौर में साहित्यिक आयोजनों में आने वाले लोगों की संख्या को बढ़ा-चढ़ाकर बताने का प्रचलन है। कई आयोजनों में अंगुलियों पर गिनने की संख्या में लोग होते हैं, पर बताया जाता है कि सैकड़ों लोग मौजूद थे। ऐसा ही एक आयोजन पिछले दिनों विश्व पुस्तक दिवस के अवसर पर मध्य भारत हिंदी साहित्य समिति के सभागार में हुआ। इंदौर संभाग पुस्तकालय संघ द्वारा शहर के करीब 111 लेखकों, प्राचार्यों, ग्रंथपालों का सम्मान किया गया था। आयोजकों में शामिल एक सज्जन जब मंच से बोल रहे थे तो उन्होंने कहा कि कार्यक्रम के प्रति आपका उत्साह देखकर लग रहा है कि अगली बार 400-500 लोगों का सम्मान भी किया जा सकता है। इस पर दर्शक दीर्घा में बैठे लोग कानाफूसी कर रहे थे, कि जिस हाल में कार्यक्रम हो रहा है, उसकी क्षमता 125 लोगों की है और 111 लोग तो सम्मानित होने वाले हैं। पता नहीं इनको कौन सा उत्साह नजर आ रहा है।