संयुक्त राष्ट्र में इजरायल के साथ आया भारत, हमास को जमकर सुनाया, प्रस्ताव पर वोटिंग से बनाई दूरी

Updated on 28-10-2023 02:41 PM
न्यूयॉर्क: संयुक्त राष्ट्र महासभा ने शुक्रवार को गाजा में इजरायली सेना और हमास आतंकवादियों के बीच संघर्ष पर एक प्रस्ताव पेश किया गया। इस प्रस्ताव का मकसद गाजा में "तत्काल, टिकाऊ और निरंतर मानवीय संघर्ष विराम" का आह्वान करना था। इस प्रस्ताव पर हुई वोटिंग के बाद यूएन न्यूज सेंटर ने ट्वीट कर कहा कि संयुक्त राष्ट्र महासभा ने मौजूदा गाजा संकट पर "नागरिकों की सुरक्षा और कानूनी और मानवीय दायित्वों को कायम रखने" पर प्रस्ताव अपना लिया गया है। इस प्रस्ताव के पक्ष में 120 वोट, विपक्ष में 14 वोट और अनुपस्थितों की संख्या 45 रही। दरअसल भारत भी उन देशों में शामिल था, जिसने इस प्रस्ताव पर मतदान में हिस्सा नहीं लिया। लेकिन, चर्चा के दौरान भारत ने खुलकर इजरायल का पक्ष लिया और आतंकवाद की जमकर आलोचना की।

जॉर्डन के प्रस्ताव पर कौन-कौन से देश रहे अनुपस्थित

संयुक्त राष्ट्र महासभा में इजरायल गाजा विवाद पर यह प्रस्ताव जॉर्डन ने पेश किया था। इस प्रस्ताव पर मतदान से अनुपस्थित रहने वाले 45 देशों में आइसलैंड, भारत, पनामा, लिथुआनिया और ग्रीस शामिल थे। यह प्रस्ताव इजरायल-फिलिस्तीन संकट पर संयुक्त राष्ट्र महासभा के आपातकालीन विशेष सत्र के दौरान अपनाया गया था। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने गाजा एन्क्लेव के अंदर फंसे नागरिकों के लिए जीवनरक्षक आपूर्ति और सेवाओं के निरंतर, पर्याप्त और निर्बाध पहुंच की भी मांग की। यूएनजीए में मतदान ऐसे समय में हो रहा है जब इजरायल ने गाजा में जमीनी अभियान बढ़ाने की घोषणा की है।

भारत ने इजरायल के खिलाफ प्रस्ताव पर क्या कहा


भारत ने जॉर्डन के पेश किए गए इजरायल-फिलिस्तीन प्रस्ताव पर दूरी जरूर बनाए रखी पर आतंकवाद को लेकर हमास पर जमकर निशाना साधा। भारत ने कहा कि वह इजरायल फिलिस्तीन संघर्ष को दूर करने के लिए द्वि-राष्ट्र समाधान के लिए प्रतिबद्ध है। संयुक्त राष्ट्र में भारत की उप दूत योजना पटेल ने इजरायल में हुए हमास के आतंकी हमले पर दुख जताया और इस बात पर जोर दिया कि आतंकवाद का कोई औचित्य नहीं है। उन्होंने इजरायली बंधकों की तत्काल रिहाई का आह्वान किया और गाजा में चिंताजनक मानवीय स्थिति पर भी दुख जताया। उन्होंने कहा कि भारत तनाव कम करने के प्रयासों का समर्थन करता है और फिलिस्तीन की मदद के लिए हमेशा तैयार है।

प्रस्ताव में इजरायल पर हमास के हमलों का जिक्र नहीं


जॉर्डन के इस प्रस्ताव में 7 अक्टूबर के हमास आतंकवादी हमलों का कोई विशेष उल्लेख नहीं है। जॉर्डन ड्राफ्ट प्रस्ताव को रूस, संयुक्त अरब अमीरात, पाकिस्तान और बांग्लादेश सहित क्षेत्र के 40 देशों ने समर्थन दिया था। इसने इजरायल की कार्रवाई की निंदा की, लेकिन हमास के आतंकवादी हमले की नहीं, हालांकि, कनाडा के पेश किए गए संशोधन ने हमास के आतंकवादी हमले की निंदा की। लेकिन, कनाडा का संशोधन संयुक्त राष्ट्र महासभा में पारित नहीं हो सका। वह दो-तिहाई बहुमत हासिल करने में पूरी तरह से विफल रहा। कनाडा के प्रस्तावित संशोधन इजरायल में 7 अक्टूबर को शुरू हुए हमास के हमलों और बंधकों की घटना की निंदा से जुड़ा हुआ था।

कनाडा के संशोधन प्रस्ताव के पक्ष में भारत


इस बीच, संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के स्थायी प्रतिनिधि मुनीर अकरम ने कहा कि अगर कनाडा अपने संशोधन में निष्पक्ष रहा तो वह इजरायल के साथ-साथ हमास का भी नाम लेने पर सहमत होगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि किसी भी पक्ष का नाम नहीं लेना सबसे अच्छा विकल्प था। उन्होंने कहा कि अगर आपको निष्पक्ष और न्यायसंगत और निष्पक्ष होना है तो इजरायल का नाम भी रखना होगा। मसौदा प्रस्ताव में कनाडा के नेतृत्व वाले संशोधन पर मतदान के दौरान, 88 ने संशोधन के पक्ष में मतदान किया, 55 ने संशोधन के खिलाफ मतदान किया और 23 मतदान से अनुपस्थित रहे। संशोधन के पक्ष में मतदान करने वाले देशों में भारत, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रिया और यूक्रेन शामिल थे।

जॉर्डन ने तुरंत युद्धविराम की जताई आवश्यकता


मतदान से पहले, संयुक्त राष्ट्र में जॉर्डन के स्थायी प्रतिनिधि, महमूद दैफल्लाह हमूद ने कहा कि तत्काल युद्धविराम की तत्काल आवश्यकता को कम करके आंका नहीं जा सकता। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि फिलिस्तीनी लोगों की पीड़ा आने वाली पीढ़ियों पर एक स्थायी छाप छोड़ने के लिए नियत है। उन्होंने कहा कि उनके संकल्प का सरल लेकिन महत्वपूर्ण लक्ष्य उसी उद्देश्य से मेल खाता है जिसके लिए संयुक्त राष्ट्र की स्थापना की गई थी, शांति और अंतरराष्ट्रीय कानून का अनुपालन।


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