भारत को लगने लगी चोट, गोल्‍डमैन सैक्‍स ने घटा दिए ग्रोथ के अनुमान, ईरान युद्ध खिंचा तो होगा बेड़ागर्क

Updated on 19-03-2026 01:08 PM
नई दिल्‍ली: गोल्डमैन सैक्स ने भारत की ग्रोथ के अनुमानों में कटौती कर दी है। अपने पूर्वानुमान में उसने आधा फीसदी की कमी की है। पश्चिम एशिया संघर्ष को उसने एक अलग तरह का तेल संकट बताया है। एक ऐसा संकट जो इस क्षेत्र में भारत की आर्थिक निर्भरता के दोनों छोरों को एक साथ प्रभावित करता है। इसके कारण रुपया एक साल के भीतर डॉलर के मुकाबले 95 तक पहुंचा सकता है।

गोल्डमैन सैक्स के एमडी और चीफ इंडिया इकोनॉमिस्‍ट शांतनु सेनगुप्ता ने नाउ पर कंपनी के विस्तृत परिदृश्य की रूपरेखा प्रस्तुत की। यह सिनेरियो 21 दिनों के लिए होर्मुज स्‍ट्रेट के बंद होने, उस अवधि के दौरान तेल की कीमत लगभग 100 डॉलर और अप्रैल में धीरे-धीरे घटकर 85 डॉलर और वर्ष की दूसरी छमाही तक 70 डॉलर तक पहुंचने की स्थिति पर आधारित है।

क्‍यों यह तेल संकट अलग है?

भारत ने पहले भी ऊर्जा कीमतों में आए झटकों को झेला है। लेकिन, सेनगुप्ता का कहना है कि इस बार की घटना में स्‍ट्रक्‍चरल ट्विस्‍ट है। यह इसे संभालना और भी कठिन बना देता है। पिछली हर साइकिल में तेल की बढ़ती कीमतों ने मिडिल ईस्‍ट अर्थव्यवस्थाओं को समृद्ध किया। भारत को इस क्षेत्र से निर्यात की बढ़ती मांग और घर आने वाले अधिक धन (रेमिटेंस) के जरिये अप्रत्यक्ष रूप से फायदा हुआ। अब यह संतुलन नहीं रह गया है।इस इंटीग्रेशन का पैमाना चौंकाने वाला है। सेनगुप्ता ने इस क्षेत्र पर भारत की निर्भरता के सटीक आंकड़े दिए हैं। ये आंकड़े बताते हैं कि निर्यात, ऊर्जा आयात और धन पर एक साथ पड़ने वाली मार इस संकट को पहले के संकटों से गुणात्मक रूप से अलग क्यों बनाती है।
फर्म का केंद्रीय पूर्वानुमान इस धारणा पर आधारित है कि राजकोषीय नीति घरेलू झटके के ज्‍यादातर हिस्से को एबजॉर्ब कर लेगी । यह 2022 के कमोडिटी चक्र के दौरान अपनाई गई रणनीति जैसी है। तब सरकार ने उर्वरक सब्सिडी को जीडीपी के आधा फीसदी तक बढ़ाया। तेल और डीजल पंप की कीमतों को स्थिर रखा।
सेनगुप्ता को इस ढांचे के तहत आरबीआई की ओर से ब्याज दरें बढ़ाने की उम्मीद नहीं है। महंगाई 2-2.5% के बेहद निचले स्तर से बढ़ रही है और विकास में आई गिरावट को निकट भविष्य में सबसे बड़ी चिंता के रूप में देखा जा रहा है। केंद्रीय बैंक से उम्मीद की जाती है कि वह ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा। विदेशी मुद्रा से संबंधित किसी भी तरह की कमी को पूरा करने के लिए ओपन मार्केट ऑपरेशन के जरिये लिक्विडिटी का प्रवाह जारी रखेगा।

रुपया 95 के लेवल पर क्‍यों पहुंच सकता है?

वैसे तो राजकोषीय उपाय घरेलू विकास और महंगाई को काफी हद तक बचा सकते हैं। लेकिन, सेनगुप्ता साफ कहते हैं कि बाहरी खाते को उसी तरह से मैनेज नहीं किया जा सकता। भारत का चालू खाता घाटा (CAD) कैलेंडर वर्ष 2025 के स्तर से लगभग तीन गुना बढ़ने का अनुमान है। अब लगातार दूसरे वर्ष भुगतान संतुलन में घाटा होने की संभावना दिख रही है।
भारत इस झटके का सामना अपेक्षाकृत मजबूत स्थिति से कर रहा है। GDP के हिस्से के रूप में बाहरी कर्ज कम है। विदेशी मुद्रा भंडार 700 अरब डॉलर से ऊपर है। लेकिन, प्रवाह का माहौल बिगड़ने और रेमिटेंस (विदेशों से आने वाले पैसे) पर दबाव के चलते अगले छह से 12 महीनों में रुपया अपने मौजूदा स्तर लगभग 92 से गिरकर 95 के स्तर तक पहुंचने की उम्मीद है।

अगर संकट लंबा खिंचता है तो...

सेनगुप्ता बताते हैं कि अगर तेल की कीमतें एक तिमाही या उससे ज्‍यादा समय तक 100 डॉलर से ऊपर बनी रहती हैं तो क्या होगा। सरकार की राजकोषीय रूप से इस झटके को झेलने की क्षमता पर लगातार दबाव बढ़ता जाएगा। - यानी पेट्रोल पंपों की कीमतों को स्थिर रखना और उर्वरक की पूरी लागत उठाना मुश्किल होगा। किसी न किसी मोड़ पर इसका बोझ उपभोक्ताओं पर डालना जरूरी हो जाएगा।

अगर ऐसा होता है, तो RBI के लिए समीकरण काफी हद तक बदल जाएंगे। महंगाई अनुमान से ज्‍यादा बढ़ सकती है और साल के आखिर में ब्याज दरों में बदलाव की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।


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