
साथ ही गंभीर गलती होने पर नियमानुसार दंडित करने हेतु विभागीय जांच प्रारंभ की जाएगी। राज्य शासन ने मंगलवार को इस संबंध में निर्देश जारी किए हैं। दरअसल, निकायों में ठेकेदारों के भुगतान के संबंध में विभिन्न मामलों में न्यायालय में ठीक से पक्ष नहीं रखने, अपील नहीं करने और अन्य कारणों से न्यायालयीन प्रकरण निराकृत होने की जगह उल्टा उनमें ठेकेदारों द्वारा अवमानना याचिका दायर की जाती है। इसमें भुगतान के लिए राज्य सरकार को पक्षकार बनाया जाता है। इस कारण यह आदेश जारी किया गया है।
उल्लेखनीय है कि ठेकेदार (याचिकाकर्ता) द्वारा चाही गई राशि विवादित और अतार्किक होने के बाद भी निकाय की ओर से न्यायालय में सही पक्ष नहीं रखने के कारण समय-सीमा में भुगतान जारी करने के आदेश जारी किए गए हैं। कई बार निकाय द्वारा समय-सीमा में पुनरीक्षण अपील भी दायर नहीं की जाती, जिससे कुछ समय बाद याचिकाकर्ता द्वारा अवमानना प्रकरण दायर किए जा रहे हैं। हाल ही में झाबुआ एवं पिपलौदा (रतलाम) में ऐसा ही हुआ है। दोनों में राज्य शासन को पक्षकार बनाया गया है।