
ललित नारायण कटारिया: मप्र के इतिहास में 1957 में दूसरे चुनाव हुए, देखा जाए तो अस्तिव में आए नए मप्र का यह पहला चुनाव था। मप्र की राजधानी भोपाल बन गई थी। पहले की तरह इस बार भी कुछ आरक्षित सीटो पर दो सदस्यीय व्यवस्था थी, हालांकि पिछले बार की 184 सीटों से विधानसभा सीट की संख्या बढ़कर 218 हो गई थी, इसमें 149 एकल तथा 69 दो सदस्यीय सीट थी और कुल संख्या 288हो गइ्र। इस चुनाव में कुल सात पार्टी और स्वतंत्र उम्मीदवारों ने भाग लिया। भी कांग्रेस ने एकतरफा जीत दर्ज की।
कांग्रेस ने कुल 232 सीटों के साथ अपना वर्चस्व कायम रखा। कांग्रेस ने सभी सीटों पर अपने उम्मीदवारों को उतारा था। वहीं दूसरे स्थान पर इस बार भी स्वतंत्र उम्मीदवार जीते, उन्होंने 20 सीटे जीतीं। प्रजा सोशिलिस्ट पार्टी के 154 उम्मीदवार मैदान में थे, इसमें से सिर्फ 12 ही जीत सके। भारतीय जनसंघ ने मैदान में तो 129 उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन सफलता सिर्फ 10 को मिली। अखिल भारतीय हिंदु महासंघ ने सात, अखिल भारतीय हिंदू महासंघ ने पांच और कम्युनिस्ट पार्टी ने दो सीट पर सफलता प्राप्त की।
ऐसे बना हमारा मध्य प्रदेश
1 नवंबर 1956 को, राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 के तहत , मध्य भारत (मंदसौर जिले के सुनेल एन्क्लेव को छोड़कर), विंध्य प्रदेश , भोपाल राज्य और राजस्थान के कोटा जिले के सिरोंज उप-विभाग को मध्य प्रदेश में मिला दिया गया, जबकि मराठी नागपुर मंडल के भाषी जिले , (अर्थात् बुलढाणा, अकोला, अमरावती, यवतमाल, वर्धा, नागपुर, भंडारा और चांदा), को बंबई राज्य में स्थानांतरित कर दिया गया था।
कुल विधानसभा 218
एकल सीट 149
दो सदस्यीय सीट 69
कुल उम्मीदवार 1108
कुल मतदाता 13871727
मतदान के लिए पात्र मतदाता 19931685
मतदान 7408768
मतदान का प्रतिशत 31.17 प्रतिशत