
जबलपुर,। हाई कोर्ट ने सामूहिक दुष्कर्म व हत्या के प्रकरण में रीवा पुलिस द्वारा लीपापोती के आरोप के मामले को गंभीरता से लिया। इसी के साथ सीबीआई भोपाल, डीजीपी, पुलिस अधीक्षक रीवा, एसएचओ हनुमना थाना, एसआई शैल यादव व अन्य को नोटिस जारी कर जवाब तलब कर लिया। न्यायमूर्ति नंदिता दुबे की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। इस दौरान याचिकाकर्ता रीवा निवासी रामलखन गुप्ता की ओर से अधिवक्ता सौरभ शर्मा ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि सामूहिक दुष्कर्म व हत्या के मामले की जांच में रीवा पुलिस लीपापोती कर रही है। लिहाजा, सीबीआई से जांच कराई जाए।
याचिकाकर्ता 30 जनवरी 2023 को अपने पिता का इलाज कराने जबलपुर आया था। उसे खबर मिली की मां की हत्या हो गई है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता सौरभ शर्मा ने कोर्ट को बताया कि सीन आफ क्राइम में सामूहिक दुष्कर्म के बाद हत्या की बात आई थी, लेकिन पुलिस ने आरोपितों के विरुद्ध महज धारा 302 के तहत प्रकरण दर्ज किया है। याचिका में आरोप लगाया गया कि गांव के रामयज्ञ पटेल, बृजेश पटेल, विवेक नंद पटेल, प्रमोद पटेल ने सामूहिक दुष्कर्म किया है और बाद में हत्या कर दी। यह भी आरोप लगाया कि अपराध को छिपाने की नीयत से मिलीभगत से नियमविरुद्ध आधी रात में दो बजे डा. आलेख प्रकाश व डा. सुप्रिया पाठक ने शव का पोस्टमार्टम कर दिया। बाद में पुलिस ने इस मामले में एक नाबालिग काे आरोपित के रूप में पेश कर दिया। याचिकाकर्ता ने प्रधानमंत्री, सीबीआई, डीजीपी सहित कई जगह शिकायतें की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं होने पर याचिका दायर की गई।