अमेरिका को छींक से दुनिया को जुकाम, तो चीन को बुखार से कैसे चलेगा काम!

Updated on 29-09-2023 01:34 PM
नई दिल्ली: कहते हैं कि अमेरिका को छींक आती है तो पूरी दुनिया को जुकाम हो जाता है। आखिर अमेरिका दुनिया की सबसे बड़ी इकॉनमी है। लेकिन अगर दुनिया की फैक्ट्री यानी चीन की तबियत खराब हो जाए तो क्या होगा? चीन दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी इकॉनमी है और करीब दो दशक से दुनिया की फैक्ट्री बनी हुई है। दुनियाभर के बाजार चीनी माल से पटे हुए हैं। दुनिया की बड़ी-बड़ी कंपनियां चीन में सामान बनाकर पूरी दुनिया में बेच रही हैं। लेकिन पिछले कुछ महीनों से चीन की इकॉनमी के बारे में डराने वाली खबरें आ रही हैं। चीन का रियल एस्टेट मार्केट संकट में है, एक्सपोर्ट लगातार गिर रहा है, बेरोजगारी चरम पर है और ग्रोथ धीमी पड़ गई है। विदेशी कंपनियां वहां से अपना बोरिया-बिस्तर समेट रही हैं और अमेरिका का साथ तनाव कम होने का नाम नहीं ले रहा है।
इस संकट की शुरुआत तो कुछ साल पहले ही हो गई थी जब देश की सबसे बड़ी रियल एस्टेट कंपनियों में से एक एवरग्रेंड (Evergrande) ने पेमेंट में डिफॉल्ट किया। इसके चेयरमैन को पुलिस कस्टडी में भेजा गया है और शेयरों की खरीद फरोख्त सस्पेंड कर दी गई है। एवरग्रेंड दुनिया में सबसे ज्यादा कर्ज में डूबी रियल एस्टेट कंपनी है। इसका असर दूसरी रियल एस्टेट कंपनियों पर भी दिखा। देखते-देखते चीन का रियल एस्टेट सेक्टर गहरे संकट में आ गया। कंस्ट्रक्शन और इससे जुड़ी एक्टिविटीज की चीन की जीडीपी में करीब 25% हिस्सेदारी है। इससे बैंकिंग सेक्टर पर भी खतरा मंडरा रहा है। माना जा रहा है कि देर-सबेर यह चीन की पूरी इकॉनमी को डुबो सकता है।

किसे होगा नुकसान

सवाल यह है कि चीन की इस परेशानी के दुनिया के लिए क्या मायने हैं। एनालिस्ट्स का मानना है कि चीन की स्थिति को बढ़ाचढ़ाकर पेश किया जा रहा है। लेकिन मल्टीनेशनल कंपनियों, उनके वर्कर्स और कई ऐसे लोगों के भी प्रभावित होने की आशंका है जिनका चीन के प्रत्यक्ष रूप से कोई लेनादेना नहीं है। बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक सिंगापुर में एशियन ट्रेड सेंटर के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर देबराह एल्म्स ने कहा कि अगर चीन के लोग खाना कम कर दें तो क्या इससे ग्लोबल इकॉनमी प्रभावित नहीं होगी? इससे आप पर फर्क नहीं पड़ेगा लेकिन उन कंपनियों पर असर पड़ेगा जो चीन को सप्लाई करती हैं।

ऐपल, फॉक्सवैगन और बरबरी जैसी सैकड़ों ग्लोबल कंपनियों की कमाई का मुख्य जरिया चीन का बाजार है। अगर चीन के लोग कम खर्च करेंगे तो इन कंपनियों का नुकसान होगा। इससे इन कंपनियों के सप्लायर्स और वर्कर्स पर असर होगा। दुनिया में एक-तिहाई ग्रोथ के लिए चीन जिम्मेदार है और वहां किसी भी तरह की सुस्ती का असर पूरी दुनिया पर दिखाई देगा। अमेरिका की क्रेडिट एजेंसी फिच ने पिछले महीने कहा था कि चीन में सुस्ती से ग्लोबल ग्रोथ की संभावनाओं पर ग्रहण लग सकता है। एजेंसी ने 2024 में पूरी दुनिया के ग्रोथ अनुमान को घटा दिया था।

किसे हो रहा फायदा

हालांकि कुछ अर्थशास्त्रियों का कहना है कि इस आइडिया को बढ़ाचढ़ाकर पेश किया जाता है कि चीन दुनिया की समृद्धि का इंजन है। यूनिवर्सिटी ऑफ ऑक्सफर्ड के चाइना सेंटर में इकनॉमिस्ट जॉर्ज मैग्नस ने कहा कि गणित के हिसाब से देखें तो यह सही है कि ग्लोबल ग्रोथ में चीन की हिस्सेदारी करीब 40 परसेंट है। लेकिन इस ग्रोथ से किसे फायदा हो रहा है। चीन का ट्रेड सरप्लस बहुत ज्यादा है। उसके इम्पोर्ट की तुलना में उसका एक्सपोर्ट बहुत ज्यादा है। इसलिए चीन की ग्रोथ से उसे ही फायदा हुआ है, दुनिया को नहीं।

चीन में डिमांड कमजोर होने से कीमतें कम रहेंगी। पश्चिमी देशों के लिए यह अच्छी बात है क्योंकि इससे कीमतों में गिरावट आएगी और महंगाई कम होगी। यानी शॉर्ट टर्म में दुनियाभर के लोगों को चीन के स्लोडाउन से फायदा होगा। लेकिन जिन देशों में चीन ने निवेश किया है, उनकी मुश्किलें बढ़ सकती हैं। चीन ने अपने बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव पर पिछले 10 साल में एक ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा खर्च किए हैं। 150 से अधिक देशों को चीन ने पैसा और टेक्नोलॉजी दी है। अगर चीन में आर्थिक समस्याएं बढ़ती हैं तो फिर वह इस निवेश से हाथ खींच सकता है।

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