15 साल पहले ही कर दिया था राम मंदिर बनाने का वादा कहानी L&T को बुलंदी पर पहुंचाने वाले 'नायक' की

Updated on 23-01-2024 02:09 PM
नई दिल्ली: अयोध्या में राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा हो चुकी है। इस मंदिर का निर्माण इंजीनियरिंग क्षेत्र की दिग्गज कंपनी लार्सन एंड टुब्रो (L&T) कर रही है। यह दुनिया की टॉप इन्फ्रा कंपनियों में शामिल है। इसने देश-विदेश में कई ऐसे प्रोजेक्ट बनाए हैं जिन्हें इंजीनियरिंग का नगीना माना जाता है। इनमें मुंबई में अटल सेतु, गुजरात में सरदार पटेल की मूर्ति स्टैच्यू ऑफ यूनिटी, अहमदाबाद में दुनिया का सबसे बड़ा क्रिकेट स्टेडियम और ओडिशा में दुनिया का सबसे बड़ा हॉकी स्टेडियम शामिल है। इसकी स्थापना आजादी से पहले दो विदेशी इंजीनियरों ने की थी लेकिन इसे बुलंदियों पर पहुंचाने का श्रेय एएम नाइक को जाता है। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का दावा है कि राम मंदिर बनाने के लिए 15 साल पहले एलएंडटी से चर्चा हुई थी। तब कंपनी के चीफ एएम नाइक ने इसे बनाने का वादा किया था। एक नजर एएम नाइक के करियर पर...

नाइक एलएंडटी में छह दशक की सेवा के बाद पिछले साल 30 सितंबर को रिटायर हो गए। बोर्ड ने उन्हें चेयरमैन एमेरिटस का स्टेटस दिया है। नाइक ने 1965 में जूनियर इंजीनियर के पद पर कंपनी में अपने करियर की शुरुआत की थी। उन्हें साल 1999 में कंपनी का सीईओ बनाया गया और जुलाई 2017 में वह एलएंडटी ग्रुप के चेयरमैन बने। अपनी मेहनत और लगन के दम पर उन्होंने कंपनी को बुलंदियों पर पहुंचाया। उनके दौर में कंपनी ने इंजीनियरिंग के साथ-साथ डिफेंस, आईटी और रियल एस्टेट में भी कदम रखे। आज की तारीख में एलएंडटी का 90% रेवेन्यू उन बिजनस से आता है जिन्हें नाइक ने शुरू किया था। कंपनी में उनके योगदान को इसी बात से समझा जा सकता है कि उनके रिटायरमेंट पर कंपनी ने शेयरहोल्डर्स को छह रुपये का स्पेशल डिविडेंड देने का फैसला किया था।

कंपनी ने कर दिया था रिजेक्ट

नाइक ने गुजरात के बिड़ला विश्वकर्मा महाविद्यालय से ग्रेजुएशन किया था और फिर L&T में नौकरी के लिए आवेदन किया। लेकिन कंपनी ने उन्हें रिजेक्ट कर दिया गया था। एलएंडटी में उस समय IIT के स्टूडेंट्स को अधिक वरीयता दी जाती थी। बाद में उन्हें कंपनी में जूनियर इंजीनियर के पद पर नियुक्त कर लिया गया। 15 मार्च 1965 में उन्होंने एलएंडटी में नौकरी जॉइन की थी। एलएंडटी की सफलता का राज बताते हुए नाइक कहते हैं कि उन्होंने 21 साल में कोई छुट्टी नहीं ली। रोजाना 15 घंटे काम किया और तब जाकर एलएंडटी आज इस मुकाम पर पहुंची है। नाइक ने रिटायरमेंट से पहले एक इंटरव्यू में कहा था कि उन्होंने परिस्थिति के हिसाब से हर तीन साल में खुद में बदलाव किया।

कॉलेज के दिनों को याद करते हुए नाइक ने कहा था कि वह क्लास में कम जाते थे और इस पर एक प्रोफेसर ने उन पर ताना मारा था। उन्होंने कहा, 'जब मैं स्टूडेंट था तो मैं दूसरी एक्टिविटीज में बिजी रहता था। क्लास में प्रोफेसर मुझे ताना मारा करते थे। वह कहते थे कि एक आदमी ऐसा है जिसने एसएससी में अच्छा स्कोर किया है लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वह कॉलेज में भी अच्छा प्रदर्शन करेगा। वह ऐसा कहकर मेरी तरफ देखते थे।' लेकिन ग्रेजुएशन करने के बाद उनकी धारा बदल गई। उन्होंने कहा, 'जिस दिन मैं कॉलेज के गेट से बाहर आया, उस दिन मैंने खुद से कहा कि स्टूडेंट लाइफ खत्म हो गई है और अब कॉरपोरेट लाइफ पर काम करने की जरूरत है। मैं ऐसा स्टूडेंट था जो शायद ही कभी क्लास में जाता था लेकिन उसके बाद मैंने खुद में बदलाव किया। नौकरी जॉइन करने के बाद मैंने 21 साल तक कोई छुट्टी नहीं ली और दिन में 15 घंटे काम किया।'

ऑफिस में ही सो जाया करते थे

अपने शुरुआती दिनों को याद करते हुए नाइक ने कहा था कि वह देर तक ऑफिस में काम करते थे और घर में उनकी पत्नी अकेली होती थी। उन्होंने कहा, 'कई बार मैं रात 12 बजे की बस मिस कर देता था। कई बार मैं ऑफिस की टेबल पर ही सोया करता था।' एलएंडटी पर देश के कई उद्योगपतियों की नजर थी लेकिन नाइक ने उन्हें कामयाब नहीं होने दिया। आज एलएंडटी का मार्केट कैप 511,682.94 करोड़ रुपये है और यह देश की 11वीं सबसे वैल्यूएबल कंपनी है। इंजीनियरिंग और इंफ्रा के साथ-साथ इसका बिजनस आईटी, फाइनेंस और रियल एस्टेट में भी फैला है। इसे बुलंदियों पर पहुंचाने का श्रेय नाइक को ही जाता है।

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