लहसुन तो रुला ही रहा है, अब प्याज भी आंसू निकालेगा, जान लीजिए वजह

Updated on 20-02-2024 02:19 PM
नासिक: इन दिनों लहसुन की कीमत आसमान में चढ़ी हुई है। जो व्यक्ति कभी किलो के हिसाब से लहसुन खरीदते थे, वह पाव में लेने लगे हैं। जो पहले पाव में लहसुन खरीदते थे, वह 100 ग्राम लेने लगे हैं। अब प्याज में भी ऐसा ही हो सकता है। क्योंकि महाराष्ट्र के प्रसिद्ध लासलगांव कृषि उपज बाजार समिति (एपीएमसी) में प्याज की औसत थोक कीमतों में सोमवार को ही 40% की वृद्धि हुई है। प्याज की कीमतों में यह बढ़ोतरी केंद्र सरकार के एक मंत्री की घोषणा के बाद हुई है।

केंद्र सरकार की मंत्री ने क्या कहा

केंद्र सरकार में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री तथा महाराष्ट्र के डिंडोरी (नासिक ग्रामीण) की सांसद डॉ. भारती पवार ने बीते रविवार को ही बताया था कि प्याज पर निर्यात का प्रतिबंध हटने वाला है। उन्होंने बताया था कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अगुवाई पिछले दिनों मंत्रियों के एक समूह की बैठक हुई थी। इसी में प्याज के निर्यात पर लगे प्रतिबंध को वापस लेने का फैसला हुआ है। हां, अभी तक इस बारे में कोई अधिसूचना नहीं आई है।

बढ़ गई थोक कीमत


एपीएमसी (APMC) के एक अधिकारी ने बताया कि इस घटनाक्रम का देश के सबसे बड़े थोक प्याज बाजार लासलगांव में औसत कीमतों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा। लासलगांव में प्याज की औसत कीमतें शनिवार के 1,280 रुपये प्रति क्विंटल से बढ़कर सोमवार को 1,800 रुपये प्रति क्विंटल हो गईं। इस दिन लगभग 10,000 क्विंटल प्याज की नीलामी की गई। सोमवार को प्याज की न्यूनतम और अधिकतम थोक मूल्य क्रमशः 1,000 रुपये और 2,100 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज किए गए।

निर्यात के लिए शुरू हो गई खरीदारी


एपीएमसी के एक अन्य अधिकारी ने कहा कि प्याज निर्यातकों ने "विदेशी बाजारों में बेचने के लिए प्याज खरीदना भी शुरू कर दिया है"। उल्लेखनीय है कि सरकार ने घरेलू बाजार में प्याज का दाम स्थिर रखने के लिए पिछले साल 7 दिसंबर को हर तरह के प्याज के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था। यह प्रतिबंध 31 मार्च, 2024 तक के लिए है। सरकार के इस कदम के बाद पिछले ढाई महीनों में प्याज की औसत थोक कीमतें 67% कम हो गईं। पिछले साल 6 दिसंबर को इसकी कीमत 3,950 रुपये प्रति क्विंटल थाी जो कि 17 फरवरी को 1,280 रुपये प्रति क्विंटल हो गईं थी।

किसानों को हो रहा है घाटा


किसानों का कहना है कि इस समय प्याज के किसानों की लागत भी नहीं निकल पा रही है। इस समय प्याज उत्पादन की लागत 1,800 रुपये प्रति क्विंटल पड़ रही है, जबकि मंडी में इससे काफी कम भाव मिल रहा है। इससे किसानों को नुकसान होता है। उनका कहना है कि पिछले ढाई महीने के दौरान वे उत्पादन लागत भी नहीं निकाल सके।

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