सुरक्षा से सम्मान तक: महिला सुरक्षा से लेकर हेल्पलाइन जैसे प्रयासों से बदल रही यूपी की 'आधी आबादी' की जिंदगी

Updated on 23-03-2026 03:24 PM
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में योगी सरकार के 9 साल पूरे हो चुके हैं। यहां महिला सुरक्षा लंबे समय तक एक बड़ा सवाल रही थी। लेकिन योगी आदित्यनाथ सरकार ने इस चुनौती को केवल कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं माना, बल्कि इसे सामाजिक बदलाव के एजेंडे के रूप में लिया। नतीजा यह हुआ कि आज यूपी में महिला सुरक्षा , त्वरित पुलिसिंग, टेक्नोलॉजी और सशक्तिकरण की योजनाएं मिलकर एक ऐसा मॉडल बना रही हैं, जहां सुरक्षा केवल दावा नहीं, बल्कि जमीन पर दिखने वाला बदलाव है। मिशन शक्ति, बीट पुलिसिंग, हेल्पलाइन 1090 और यूपी-112 जैसी व्यवस्थाओं ने न केवल अपराधों में कमी लाई है, बल्कि महिलाओं में भरोसा भी बढ़ाया है।
महिला सुरक्षा की असली शुरुआत कानून-व्यवस्था से होती है। योगी सरकार ने अपराध और अपराधियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई। वर्ष 2017 के बाद प्रदेश में न तो सांप्रदायिक दंगे हुए और न ही बड़े जातीय संघर्ष, जो महिलाओं की सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण बदलाव है।


मह‍िलाओं के प्रति अपराधों में आई गिरावट

अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई, गैंगस्टर एक्ट और एनएसए जैसे प्रावधानों का उपयोग, और अवैध संपत्तियों की जब्ती ने अपराध के इकोसिस्टम को कमजोर किया। यही कारण है कि महिलाओं के खिलाफ अपराधों में गिरावट दर्ज की गई और सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षा की भावना मजबूत हुई।


मिशन शक्ति-सुरक्षा से सशक्तिकरण तक का व्यापक अभियान

महिलाओं की सुरक्षा को संस्थागत रूप देने के लिए प्रदेश के प्रत्येक थाने में मिशन शक्ति केंद्र स्थापित किए गए। इसके संचालन के लिए 40,000 पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षित किया गया और सभी महिला अपराध इकाइयों को इसके अंतर्गत लाया गया।


आंकड़े दे रहे हर सवाल का जवाब

महिला सुरक्षा के लिए योगी सरकार द्वारा किए गए प्रयास कितने प्रभावी हैं इसका अंदाजा इसी बात से लगा सकते हैं कि प्रदेश में मिशन शक्ति केन्द्र की स्थापना के बाद सितम्बर 2025 से दिसम्बर 2025 के बीच दुष्‍कर्म की घटनाओं में 33.92%, महिलाओं एवं बच्चों के अपहरण में 17.03%, दहेज हत्या में 12.96% और घरेलू हिंसा में 9.54% की कमी दर्ज की गई। महिला एवं बाल अपराधों के निस्तारण में 98.90 प्रतिशत के साथ उत्तर प्रदेश देश में प्रथम स्थान पर है और पेंडेंसी रेट मात्र 0.20 प्रतिशत है। यह केवल आंकड़े नहीं, बल्कि सिस्टम की दक्षता का प्रमाण हैं।


बीट पुलिसिंग और महिला भागीदारी- सुरक्षा का स्थानीय मॉडल

महिला सुरक्षा को जमीनी स्तर तक पहुंचाने के लिए 19,839 महिला पुलिसकर्मियों की नियुक्ति की गई और 9,172 महिला बीटों का आवंटन किया गया। इसका मतलब यह है कि अब महिलाओं की सुरक्षा केवल थाने तक सीमित नहीं, बल्कि मोहल्लों और गांवों तक पहुंच गई है। इसके साथ ही पुलिस भर्ती में महिलाओं के लिए 20% आरक्षण सुनिश्चित किया गया और आज 44,000 से अधिक महिलाएं उत्तर प्रदेश पुलिस का हिस्सा हैं। यह बदलाव सुरक्षा के साथ-साथ सशक्तिकरण का भी प्रतीक है।


हेल्पलाइन और त्वरित प्रतिक्रिया - सिस्टम हुआ जवाबदेह

महिला सुरक्षा में हेल्पलाइन सेवाओं ने अहम भूमिका निभाई है। वीमेन पावर लाइन 1090, महिला हेल्पलाइन 181, यूपी-112 और अन्य सेवाओं का एकीकरण कर एक मजबूत रेस्पॉन्स सिस्टम तैयार किया गया। यूपी-112 ने 3 करोड़ 10 लाख से अधिक कॉल अटेंड किए हैं। सबसे अहम बात यह है कि इसका रिस्पांस टाइम 1 घंटा 5 मिनट से घटाकर 6 मिनट 41 सेकंड कर दिया गया है। यानी अब संकट की स्थिति में मदद मिनटों में पहुंच रही है। इसी तरह, सोशल मीडिया पर आत्महत्या से जुड़े पोस्ट पर संज्ञान लेकर 1,769 लोगों की जान बचाना यह दिखाता है कि सिस्टम केवल अपराध रोकने तक सीमित नहीं, बल्कि जीवन बचाने तक सक्रिय है।


एंटी रोमियो स्क्वायड से लेकर ऑपरेशंस तक - बहुस्तरीय सुरक्षा तंत्र

यूपी में पिछले 9 वर्षों में महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा के लिए हर जिले में एंटी रोमियो स्क्वायड का गठन किया गया। इसके साथ ही, मिशन शक्ति 5.0, ऑपरेशन गरुड़, ऑपरेशन शील्ड, ऑपरेशन बचपन, ऑपरेशन रक्षा जैसे अभियानों के जरिए सुरक्षा को अभियान स्तर पर लागू किया गया। मानव तस्करी पर नियंत्रण के लिए 75 एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट्स को थानों में परिवर्तित किया गया। यह दिखाता है कि सरकार ने महिला सुरक्षा को केवल एक पहल नहीं, बल्कि बहुस्तरीय रणनीति के रूप में लागू किया।


तकनीक का सहारा - स्मार्ट पुलिसिंग से मजबूत सुरक्षा

तकनीकी हस्तक्षेप ने महिला सुरक्षा को और मजबूत किया है। प्रहरी बीट पुलिसिंग एप, UPCOP एप और यक्ष एप जैसे डिजिटल टूल्स के जरिए अपराधियों की निगरानी और नागरिक सेवाओं को तेज किया गया। 50 लाख से अधिक लोग इन एप्स को डाउनलोड कर चुके हैं और 2 करोड़ 10 लाख से अधिक एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं। साइबर अपराधों से निपटने के लिए सभी 75 जिलों में साइबर क्राइम थाने स्थापित किए गए हैं। इसके साथ ही 12,61,495 सीसीटीवी कैमरों की स्थापना के जरिए निगरानी तंत्र को मजबूत किया गया, जिससे अपराधों के खुलासे में तेजी आई।


फास्ट ट्रैक न्याय और संस्थागत सुधार - भरोसे की नई नींव

महिलाओं के खिलाफ अपराधों के त्वरित निस्तारण के लिए 81 फास्ट ट्रैक कोर्ट को स्थायी किया गया और 212 अस्थायी फास्ट ट्रैक कोर्ट की निरंतरता बनाए रखी गई। इससे न्याय प्रक्रिया तेज हुई और पीड़ितों को समय पर न्याय मिलने लगा। फॉरेंसिक लैब की संख्या 4 से बढ़ाकर 12 की गई और हर मंडल में एक लैब स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है। इससे जांच की गुणवत्ता और गति दोनों में सुधार हुआ है।


बदलाव की दिशा - सुरक्षा से सम्मान तक की यात्रा

उत्तर प्रदेश में महिला सुरक्षा अब केवल कानून-व्यवस्था का विषय नहीं, बल्कि सामाजिक सम्मान का आधार बन चुकी है। सख्त कानून, मजबूत पुलिसिंग, तकनीकी हस्तक्षेप और संस्थागत सुधार - इन सबके समन्वय ने एक ऐसा मॉडल तैयार किया है, जिसमें महिला सुरक्षा और सशक्तिकरण साथ-साथ आगे बढ़ रहे हैं। यही कारण है कि आज यूपी की आधी आबादी केवल सुरक्षित ही नहीं, बल्कि अधिक आत्मविश्वासी और सशक्त भी नजर आ रही है।

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