राजस्थान के पूर्व मंत्री डॉ. राजकुमार शर्मा और उनके भाई हिरासत में, हुआ उनके पैतृक गांव में हंगामा

Updated on 13-05-2026 06:38 PM
झुंझुनूं: गहलोत सरकार में मंत्री और नवलगढ़ (झुंझुनूं) से 3 बार विधायक रहने वाले डॉ. राजकुमार शर्मा, उनके भाई कांग्रेस नेता डॉ. राजपाल शर्मा को पुलिस ने बुधवार को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। उन्हें झुुझुनूं जिले के नवलगढ़ उपखंड क्षेत्र स्थित पैतृक गांव परसरामपुरा से हिरासत में ले लिया। दरअसल,पूर्व मंत्री शर्मा और उनके सैकड़ों समर्थकों ने परसरामपुरा गांव में बने खेल स्टेडियम को तोडऩे का विरोध किया था। उन्होंने बड़ी संख्या में पुलिस एवं प्रशासनिक आलाधिकारियों और आरएएसी जवानों की मौजदूगी में गिरफ्तारी दी। पुलिस इन लोगों को अपनी वैन में बिठाने के बाद गांव से लेकर चली गई। खास बात रही कि पूर्व मंत्री के वयोवृद्ध पिता और शिक्षाविद् रामनिवास शास्त्री ने विरोध में गिरफ्तारी दी। इस दौरान 5 पुलिस वाहनों में चढक़र लोकल जनप्रतिनिधियों सहित सैंकड़ों ग्रामीणों ने भी गिरफ्तारी दी।

आज शेखावाटी की राजनीति का तापमान चढ़ा

दरअसल, झुंझुनूं जिले के नवलगढ़ उपखंड के परसरामपुरा गांव में बुधवार सुबह ऐसा सियासी और प्रशासनिक घटनाक्रम देखने को मिला, जिसने शेखावाटी की राजनीति का तापमान भी बढ़ा दिया। हाईकोर्ट के आदेश की पालना में प्रशासन ने नदी के बहाव क्षेत्र में बने खेल स्टेडियम की चारदीवारी पर बुलडोजर चला दिया। कार्रवाई का विरोध करने पहुंचे पूर्व चिकित्सा मंत्री और चार बार नवलगढ़ विधायक रह चुके डॉ. राजकुमार शर्मा, उनके भाई राजस्थान विवि के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष डा. राजपाल शर्मा सहित सैंकडों लोगों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया।

आरोप-प्रत्यारोप और अपनी-अपनी बात

इधर, प्रशासनिक अधिकारी कोर्ट के आदेश पर माने गए अतिक्रमण को हटाने की कार्रवाई को अंजाम देना बता रहे हैं। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है नवलगढ़ क्षेत्र के परसरामपुरा गांव में स्थित स्टेडियम पर प्रशासन ने हाईकोर्ट के आदेश की पालना में बुलडोजर से खेल स्टेडियम की दीवार ध्वस्त करने कार्रवाई को अंजाम दिया गया। वही दूसरी ओर सियायात में यह सिर्फ अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई नहीं मानी जा रही हैं बल्कि इसे नवलगढ़ की सियासत में शक्ति प्रदर्शन के रूप में भी देखा जा रहा है। एक ओर प्रशासन कोर्ट आदेश पर कार्रवाई की तो दूसरी ओर डॉ. शर्मा एवं समर्थक इसे राजनीतिक प्रतिशोध बताते रहे। लोगों का कहना है कि परसरामपुरा की यह कार्रवाई सिर्फ अतिक्रमण हटाने तक सीमित नहीं रही। बुलडोजर ने जहां स्टेडियम की दीवार ढहाई, वहीं इस घटनाक्रम ने कांग्रेस और भाजपा के बीच सियासी टकराव को भी नया मोड़ दे दिया। एक तरफ प्रशासन कोर्ट आदेश की पालना का दावा कर रहा है, तो दूसरी तरफ पूर्व मंत्री राजकुमार शर्मा सहित विपक्ष इसे युवाओं के सपनों और जनभावनाओं पर बुलडोजर बता रहा है।

यूं चला बुलडोजर और गर्माया तनाव
प्रशासन ने तय रणनीति के तहत सूरज निकलने से पहले ही कार्रवाई शुरू कर दी। भारी पुलिस बल, प्रशासनिक अधिकारी और जेसीबी मशीनें परसरामपुरा पहुंचीं। लगभग 700 मीटर लंबी स्टेडियम की चारदीवारी और अधूरी संरचना को हटाने का काम शुरू किया गया। इस दौरान गांव में माहौल तनावपूर्ण हो गया। मंगलवार शाम से ही डॉ. राजकुमार शर्मा अपने समर्थकों और ग्रामीणों के साथ धरने पर बैठे हुए थे। जैसे ही बुलडोजर आगे बढ़ा, विरोध तेज हो गया और नारेबाजी शुरू हो गई।

पूर्व मंत्री ने दी गिरफ्तारी, भाई भी साथ
सबसे पहले डॉ. राजकुमार शर्मा ने गिरफ्तारी दी। इसके बाद उनके भाई डॉ. राजपाल शर्मा भी समर्थकों के साथ पुलिस के सामने खड़े हो गए। दोनों को पुलिस वाहन में बैठाकर हिरासत में लिया गया। गिरफ्तारी देने वालों में आरएलपी नेता मुकेश रणवां, सुभीता सीगड़ सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण और समर्थक शामिल रहे।

पिता रामनिवास शास्त्री भी बोले: मुझे भी गिरफ्तार करो
घटनास्थल पर उस समय भावुक दृश्य बन गया जब डॉ. शर्मा के पिता, शिक्षाविद और सेवानिवृत्त शिक्षक रामनिवास शास्त्री भी मौके पर पहुंचे और गिरफ्तारी देने पर अड़ गए। उम्र और स्वास्थ्य को देखते हुए उन्हें समझाने की कोशिश की, लेकिन वे नहीं माने। बाद में पुलिस ने उन्हें एंबुलेंस में बैठाकर हिरासत में लिया।
युवाओं के सपनों पर बुलडोजर: राजकुमार शर्मा
वहीं पूर्व मंत्री राजकुमार शर्मा लगातार कह रहे है कि प्रशासन सत्ताधारी भाजपा लोगों के दबाब में काम रहा है। प्रशासन चाहता तो उन्हें उच्च कानूनी कार्रवाई का समय देकर स्टेडियम दीवार को तोडऩे से बचा सकता था। पूर्व मंत्री शर्मा का कहना है कि स्टेडियम सार्वजनिक संपत्ति है फिर भी राहत नहीं दी गई। यहीं नहीं डॉ. शर्मा प्रशासन की कार्रवाई को राजनीतिक दबाव का परिणाम बताते हुए लगातार कह रहें कि यह स्टेडियम युवाओं के भविष्य के लिए बनाया गया था और इसे बचाया जाना चाहिए था। उनका आरोप था कि यदि निर्माण गलत था तो प्रशासन ने इसे बनने ही क्यों दिया? उन्होंने कहा कि अब तैयार खेल मैदान को तोडऩा क्षेत्र की खेल प्रतिभाओं के सपनों को ध्वस्त करने जैसा है।

प्रशासन का पक्ष: कोर्ट के आदेश की पालना
जिला प्रशासन का कहना है कि राजस्थान हाईकोर्ट के आदेश की पालना में नदी के बहाव क्षेत्र में बने अतिक्रमण को हटाना अनिवार्य था। इससे पहले कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट डा. अरूण गर्ग ने पहले ही कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल की मांग की थी। प्रशासन ने 250 पुरुष और 60 महिला कांस्टेबल सहित कुल 310 पुलिसकर्मियों का जाब्ता मांग कर कार्रवाई को अंजाम दिया गया। इस दौरान एएसपी दवेन्द्रसिंह राजावत, एडीएम अजय आर्य, एसडीएम कुलदीप सिंह शेखावत, डीएसपी महावीर सिंह, तहसीलदार सीताराम कुमावत सहित पुलिस एवं प्रशाासन के अधिकारी मौके पर मौजूद रहे।

परसरामपुरा गांव में बना खेल स्टेडियम लंबे समय से सुर्खियो में
पूर्व मंत्री डा. राजकुमार शर्मा के पैतृक गावं परसरामपुरा का यह खेल स्टेडियम लंबे समय से विवादों में रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि इसकी नींव तत्कालीन जिला कलेक्टर यू.डी. खान और जिला खेल अधिकारी राजेश ओला ने रखी थी। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि निर्माण नियमों के विरुद्ध था तो उस समय इसे रोकने की कार्रवाई क्यों नहीं की गई। ग्रामीणों का कहना है कि बाउंड्री वॉल टूटने से स्टेडियम ही खत्म हो जाएगा। ग्रामीणों ने मांग की है कि स्टेडियम की नींव रखने वाले तत्कालीन अधिकारियों को भी बर्खास्त किया जाए। उस समय प्रशासन क्या कर रहा था। अगर यह गलत ही था तो इसे बनने ही क्यों दिया।

अब एक बार फिर सुर्खियो में डॉ. राजकुमार शर्मा
डॉ. राजकुमार शर्मा राजस्थान कांग्रेस के प्रमुख नेताओं में गिने जाते हैं। वे नवलगढ़ विधानसभा सीट से 3 बार विधायक रहे हैं और अशोक गहलोत सरकार में चिकित्सा मंत्री तथा मुख्यमंत्री के सलाहकार रह चुके हैं। 2023 के विधानसभा चुनाव में वे भाजपा के विक्रमसिंह जाखल से चुनाव हार गए थे। अब इस कार्रवाई के बाद एक बार फिर नवलगढ़ की राजनीति में राजकुमार शर्मा केंद्र में आ गए हैं। भाजपा से मौजूदा विधायक विक्रमसिंह और पूर्व एमएलए एवं मंत्री रहे डा. राजकुमार शर्मा के बीच लंबे समय चलती राजनैतिक अदावत के बाद इलाके में एक बार फिर सियासत का पारा गर्मा गया।

फिलहाल हालात शांत, लेकिन सियासत गरम
करीब 200 लोगों को हिरासत में लेने के बाद प्रशासन ने कार्रवाई जारी रखी। मौके पर स्थिति फिलहाल नियंत्रण में है, लेकिन परसरामपुरा का यह स्टेडियम अब नवलगढ़ की राजनीति का नया अखाड़ा बन चुका है और आने वाले दिनों में सियासी बयानबाजी और तेज होने की पूरी संभावना है।

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