
शाम करीब सवा पांच बजे सब इंस्पेक्टर सुरेश के पिता मोहनलाल सूर्यवंशी आगर मालवा के बूंदीकला गांव से हमीदिया अस्पताल पहुंचे। कार से उतरते ही वह बहू के पिता (समधी) शिवलाल वर्मा से लिपटकर रोने लगे। बोले- धुलेंडी के दिन बेटे सुरेश से बात हुई थी। वह बहुत खुश था। बताया था कि होली खेली है। नाती इवान का 17 मार्च को बर्थडे साथ में मनाने के लिए बोला था। बर्थडे पर वह गांव आने के लिए बोला था। बेटा ऐसा नहीं कर सकता। सुरेश की मां रेशमबाई ने कहा- मेरा सब कुछ चला गया। बेटा-बहू को कोई परेशानी नहीं थी। दोनों खुशी-खुशी रह रहे थे।
तीन साल में कॉन्स्टेबल से बने एसआई
सुरेश का बड़ा भाई गोकुल खांगुड़ा पेशे से पटवारी है। गोकुल ने बताया कि सुरेश पढ़ने में होशियार था। उसने गणित विषय से बीएससी की थी। वर्ष 2013 में उसका चयन कॉन्स्टेबल के लिए हुआ था। उसकी पोस्टिंग इंदौर में थी। बाद में 2016 में उसका एसआई में सिलेक्शन हुआ। इसके बाद से वह भोपाल में रहने लगा। वह UPSC की भी तैयारी कर रहा था। वह बहुत खुश रहता था। कोई परेशानी होती, तो हमें जरूर बताता।
गोकुल पूरी कहानी पर जताया संदेह
गोकुल ने पूरे घटनाक्रम पर संदेह जताया है। उन्होंने सवाल उठाया कि सुरेश के पास सर्विस रिवॉल्वर थी। ऐसे में मीट काटने वाले चाकू से हत्या क्यों करेगा? फिर सुसाइड करने उतनी दूरी क्यों जाएगा? उसके घर की चाबी, गाड़ी की चाबी भी नहीं मिली है। इससे कई सवाल खड़े होते हैं। पुलिस को हर स्तर पर जांच करनी चाहिए।
पहली नजर में कृष्णा से हो गया था प्यार
गोकुल ने बताया कि सुरेश के ससुर शिवलाल वर्मा मारफेड में पदस्थ थे। वह मूलत: जीरापुर के ब्राम्हण गांव के रहने वाले हैं। हमारी उनसे पहले से रिश्तेदारी है। भाई सुरेश के लिए हम लोग गांव बूंदीपुर से उसकी शादी के लिए लड़की देखने शिवलाल वर्मा के घर भोपाल आए थे। तब सुरेश की पहली मुलाकात कृष्णा से हुई थी। दोनों के बीच प्रेम-प्रसंग चलने लगा। 2017 में दोनों की शादी करा दी। कृष्णा ने बीकॉम की पढ़ाई की थी। वह हाउस वाइफ थी।
पत्नी को रोजाना मायके छोड़ता था सुरेश
सुरेश की ससुराल उसके घर से करीब 350 मीटर दूर है। वह रोजाना ऑफिस जाते समय पत्नी कृष्णा को उसके मायके में छोड़ देता था, जहां बेटा अन्य बहनों के बच्चों और नाना-नानी के साथ खेलता रहता था। शाम को ड्यूटी से लौटते समय वह पत्नी और बच्चे को लेकर घर आता था। माता-पिता के बाहर जाने के कारण शुक्रवार को कृष्णा मायके नहीं गई थी। पड़ोस में रहने वाली सुधा वर्मा ने बताया कि शुक्रवार शाम करीब 7 बजे कृष्णा बच्चे को साइकिल पर घुमा रही थी। उनके बीच कभी किसी ने विवाद होने की जानकारी नहीं दी। साले हरीश ने भी दाेनों के बीच विवाद की बात नहीं बताई है।
साले ने जताया वारदात पर संदेह
एसआई के साले हरीश वर्मा ने बताया कि वह मूलत: राजगढ़ ब्यावरा का रहने वाले हैं। वर्तमान में कोलार में स्वागत बंगले काॅलोनी में रहते हैं। परिवार में माता-पिता के अलावा चार बड़ी बहनें हैं। इनमें कृष्णा सबसे छोटी थी। वर्ष 2018 में सुरेश कुमार और कृष्णा की अरेंज मैरिज करवा दी थी।
जीजा जी का नेचर अच्छा था। इस केस में कोई चौथा व्यक्ति हो सकता है। पारिवारिक नहीं है, पुलिसवालों का मैटर है। पुलिस वालों की आपस में तो दुश्मनी रहती है, बाहर भी रहती है। आशंका है कि किसी बाहर वाले की साजिश हो सकती है। जीजा जी से दो दिन पहले बात हुई थी। बहन से शुक्रवार रात 7.30 बजे बात हुई थी। कहा था कि गेहूं पिसवाकर रख लेना। वारदात वाले दिन माता-पिता परिवार में गमी होने के कारण राजगढ़ गए थे। शनिवार को वह सीआरपीएफ का पेपर देने गया था। इस बीच, बड़ी बहन ने फोन कर घटना के बारे में बताया।
रेलवे ट्रैक पर 200 गज तक बिखरे मिले शव के टुकड़े
ट्रेन की चपेट में आने से सुरेश के शव के चीथड़े उड़ गए। शव को सुबह जीआरपी ने करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद इकट्ठा किए। शव के टुकड़े इकट्ठा करने वाले शहाबुद्दीन बताते हैं कि करीब 200 गज तक यानी पिलर 19 से 22 तक शव के टुकड़े मिले थे। उनकी बाइक रेलवे ट्रैक से करीब 50 फीट दूर खड़ी थी। उसी की नंबर प्लेट से पुलिस ने पहचान की।
बीयर की आधी खाली बोतल और दवा का पर्चा मिला
एसआई के कमरे की तलाशी के दौरान बीयर की आधी खाली बोतल और एक दवा का पर्चा मिला है। यह पर्चा सुरेश कुमार का था, जिसमें न्यूरो से जुड़ी दवाइयों का उल्लेख है। इसके साथ बच्चे के शव के पास बेड पर ही मीट काटने वाला बका पड़ा था। बका नया दिखाई दे रहा था। अनुमान है कि उसे जल्द ही खरीदा गया होगा।
इन सवालों के जवाब आना बाकी
सवाल- 1: ऐसा क्या हुआ होगा कि सुरेश ने अपनी पत्नी- बेटे की नृशंस तरीके से हत्या कर दी? फिर बाद में खुदकुशी कर ली? वह सब-इंस्पेक्टर था, कई समस्याएं वह खुद सॉल्व कर लेता। परिजनों को भी कुछ नहीं बताया। पति-पत्नी के बीच ऐसा क्या राज था? जो दोनों पक्ष के परिजनों को कुछ नहीं पता, जबकि कृष्णा मायके के पास ही रहती थी।
सवाल- 2: पत्नी-बेटे की हत्या के बाद पांच-छह किलोमीटर दूर सुरेश रेलवे ट्रैक पर सुसाइड करने क्यों गया? वह घर पर ही सुसाइड कर सकता था? उसके पास बका समेत अन्य हथियार थे।
सवाल- 3: पुलिस जब पहुंची, तो सुरेश के घर में ताला लगा मिला। बाइक रेलवे ट्रैक किनारे मिली। घटना स्थल पर न तो उसके घर और न ही बाइक की चाबी मिली। आखिर, चाबियां कहां गईं?
सवाल- 4: वारदात के चार दिन पहले ऐसा क्या हुआ कि पति-पत्नी का झगड़ा पड़ोसियों तक पहुंचा? हालांकि वजह पड़ोसियों को भी नहीं पता। फिर घटना के दिन सुरेश के घर की टीवी का साउंड इतना तेज क्यों था? पड़ोसियों को चीख सुनाई नहीं पड़े, इसलिए टीवी का वॉल्यूम तेज किया होगा?
सवाल- 5: कृष्णा के भाई हरीश ने पुलिस पर आखिर क्यों उठाई उंगली? क्या उसे जीजा-बहन के साथ किसी तीसरे व्यक्ति की जानकारी है?
ये है मामला
सब इंस्पेक्टर सुरेश खागुड़ा (32) 2017 बैच के थे। पुलिस मुख्यालय में टेक्निकल विंग का काम देखते थे। मूल रूप से आगर मालवा जिले के बूंदीकला गांव के रहने वाले थे। 5 साल से भोपाल में ससुराल के पास ही किराए से रह रहे थे। सुरेश का शव शुक्रवार रात 11:45 बजे हबीबगंज रेलवे स्टेशन के आगे मिसरोद इलाके में रेलवे ट्रैक पर मिला, तब पहचान नहीं हो सकी थी। शनिवार सुबह 10 बजे घटनास्थल के पास बाइक (सरकारी गाड़ी) मिली। इससे उनकी पहचान हो सकी। इसके बाद पुलिस सुरेश के घर स्वागत बंगले के पास राजवैद्य कॉलोनी, कोलार पहुंची।
कृष्णा की बड़ी बहन अनीता पुलिस के साथ सुरेश के घर पहुंचीं। मकान पर बाहर से ताला लगा मिला, लेकिन घर के अंदर टीवी ऑन था। पुलिस ने आवाज दी, लेकिन जवाब नहीं मिला। खिड़की से झांक कर देखा तो कृष्णा (28) और इवान (2) के खून से लथपथ पड़े दिखे। पुलिस दरवाजे की कुंडी तोड़कर घर में दाखिल हुई। जांच में सामने आया कि हत्या अलग-अलग कमरों में की गई। महिला की हत्या जमीन पर, जबकि बच्चे की हत्या बेड पर की गई। पास में ही मीट काटने वाला चाकू (बका) पड़ा था। पुलिस का मानना है कि इसी चाकू से हत्या की गई है।