
सागर के देवरी थाना क्षेत्र के करीब तीन साल पुराने महिला को जिंदा जलाने के मामले में अदालत ने फैसला सुनाया है। प्रकरण में अपर सत्र न्यायाधीश देवरी की कोर्ट ने सुनवाई करते हुए आरोपी गनपत पुत्र गंगाराम अहिरवार, राजकुमार पुत्र सुखई अहिरवार और नीरज पुत्र गनपत को हत्या की धारा में दोषी पाते हुए आजीवन कारावास और दो हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई है। मामले में एक अन्य आरोपी अव्यस्क होने से उसका विचारण किशोर न्याय बोर्ड में विचाराधीन है। शासन की ओर से प्रकरण में पैरवी वरिष्ठ सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी लक्ष्मी प्रसाद कुर्मी ने की।
अभियोजन के मीडिया प्रभारी के अनुसार 24 मई 2020 को देवरी थाना पुलिस को देवरी अस्पताल से सूचना मिली थी कि आग से झुलसने के कारण विमला को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। सूचना पर पुलिस अस्पताल पहुंची और आहत विमला के बयान लिए।
बयानों में मृतका विमला ने बताया था कि 22 मई 2020 की रात भाई बलराम और चाचा की साराज आरती कहीं भाग गए। इसी बात को लेकर 24 मई 2020 की रात वह दरवाजे पर खड़ी थी। मम्मी-पापा पड़ोस में गए थे। तभी आरोपी गनपत, राजकुमार, नीरज और जितेन्द्र आए। वे भाई बलराम और मम्मी-पापा को गालियां देने लगे। उन्हें गालीगलौज करने से मना किया तो वे मारपीट करने के लिए घर के अंदर घुस आए। डर के कारण विमला खाना बनाने वाले कमरे में पहुंची और दरवाजा बंद करने लगी। तभी आरोपी मौके पर पहुंचे और धक्का मारकर दरवाजा खोल दिया। अंदर पहुंच गए।
केरोसिन डाला और लगा दी माचिस की तीली
खाना बनाने वाले कमरे में पहुंचकर आरोपियों ने केरोसिन की कुप्पी उठाई और विमला के ऊपर केरोसिन डाल दिया। वह आरोपियों से बचने के लिए भागने लगी तो आरोपियों ने हाथ पकड़ लिया। इसी दौरान आरोपी गनपत ने माचिस उठाई और तीली जलाकर विमला पर फेंक दी। आग की लपटों से घिरी विमला दौड़कर घर के आंगन में आ गई और बचाने के लिए चिल्लाने लगी। जिसके बाद चारों आरोपी मौके से भाग गए। वहीं परिवार वालों ने पहुंचकर जैसे-तैसे आग बुझाई। डायल-100 पुलिस की मदद से विमला को गंभीर अवस्था में देवरी स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया। जहां प्राथमिक उपचार के दौरान जिला अस्पताल सागर रैफर किया गया। इलाज के दौरान विमला ने दमतोड़ दिया। सूचना पर पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ हत्या समेत अन्य धाराओं में प्रकरण दर्ज किया।
वारदातस्थल पर मिले साक्ष्य और विमला के बयानों पर सुनाई सजा
प्रकरण में जांच करते हुए पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार किया। जांच पूरी होने पर चालान कोर्ट में पेश किया। न्यायालय ने मामले में सुनवाई शुरू की। सुनवाई के दौरान अभियोजन ने वारदातस्थल से मिले साक्ष्य, मृतका विमला के बयान और गवाहों को न्यायालय के सामने पेश किया। कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुना। जिसके बाद न्यायालय ने साक्ष्यों के आधार पर फैसला सुनाते हुए पिता-पुत्र समेत तीन आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है।