
आखिर शौक बड़ी चीज है और मध्यप्रदेश के अफसरों पर ये बात फिट बैठती है। यहां राज्य सरकार इस साल गाड़ी खरीदने और अफसरों के लिए गाड़ियां किराए पर लेने पर 225 करोड़ रु. खर्च करेगी। नई नीति के हिसाब से सरकार अब नई गाड़ियां खरीदने के बजाय पुरानी गाड़ियां किराए पर लेने को ज्यादा तवज्जो दे रही है। अफसरों को उनकी पात्रता के हिसाब से 5.50 लाख से 7.50 लाख रु. कीमत का वाहन किराए पर रखने की अनुमति है, लेकिन 25 हजार में से 5 हजार अफसर ऐसे हैं, जिनके पास 18 से 30 लाख तक की किराए की गाड़ियां हैं।
लोक निर्माण विभाग में इसकी शिकायत हुई तो मामला वित्त विभाग के पास पहुंचा। पीडब्ल्यूडी के प्रमुख सचिव सुखवीर सिंह ने जांच के आदेश दे दिए हैं। अब ये पता लगाया जा रहा है कि कौन अफसर अपनी पात्रता से ज्यादा महंगी गाड़ी में सफर कर रहा है। प्राथमिक जांच में ऐसे 10 हजार वाहन मिले हैं।
जिनके किराए पर इसी साल 31 मार्च तक 100 करोड़ रु. का भुगतान हो जाएगा। पीडब्ल्यूडी में जो शिकायत मिली है, उसमें अफसरों ने 3 गुना ज्यादा कीमत के वाहन किराए पर रखे। जिसका किराया 15 से 18 हजार रु. था, गाड़ी लग्जरी होने के कारण किराया 47 हजार रुपए महीना दिया गया।
दो साल में ट्रैवल कंपनी को 11.33 लाख का भुगतान, चार साल में कीमत वसूल
ऐसे भी मामले सामने आए हैं, जिनमें एक ट्रैवल एजेंसी को दो साल के किराए का भुगतान 11.33 लाख रु. किया गया। उसकी गाड़ी की कीमत चार साल में वसूल हो गई। ऐसे ही 10 हजार वाहनों के किराए पर इस साल 31 मार्च तक 100 करोड़ रु. खर्च हो जाएंगे। इस मामले की शिकायत एजीएमपी को भी की गई है, जिसमें पात्रता से ज्यादा खर्च किए जाने के मामले की जांच पर विचार चल रहा है।
पीडब्ल्यूडी के 35 अफसरों की शिकायत, दो विभागों में जांच... सबसे ज्यादा पीडब्ल्यूडी के अफसरों ने किराए के वाहनों पर पैसा खर्च किया है। ऐसे 35 अफसरों की शिकायत की गई है। पीडब्ल्यूडी के एक मामले की शिकायत एजीएमपी को भी की गई है, जिसमें पात्रता से ज्यादा खर्च होने के मामले की जांच करने पर विचार चल रहा है। वित्त विभाग इस बात की भी जांच करवा रहा है कि ट्रैवल एजेंसियों द्वारा किराए पर दिए गए वाहन नंबर पर रजिस्टर्ड वाहन नियमानुसार है अथवा नहीं।