रूस से आयात
भारत के कुल तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी 40 परसेंट पहुंच गई है जो यूक्रेन युद्ध से पहले महज एक परसेंट थी। पश्चिमी देशों ने रूस पर पाबंदी लगाई तो उसने सस्ते में तेल बेचना शुरू कर दिया। भारतीय रिफाइनर्स ने इस मौके को हाथोंहाथ लिया। लेकिन अब यह डिस्काउंट सिकुड़कर चार डॉलर रह गया है। साथ ही रूस तेल के ट्रांसपोर्टेशन के लिए 11 से 19 डॉलर प्रति बैरल की कीमत वसूल रहा है। यह बाल्टिक और काला सागर से पश्चिमी तट तक डिलिवरी के लिए सामान्य शुल्क का दोगुना है। अधिकारी ने कहा कि आईओसी, बीपीसीएल और एचपीसीएल ने अब तक 60 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर कोई खरीद नहीं की है। इस हफ्ते पहली बार रूसी तेल की कीमत 60 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर चली गई।देश में पेट्रोल और डीजल की कीमत में पिछले एक साल से अधिक समय से बदलाव नहीं हुआ है। रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध शुरू होने के बाद कच्चे तेल की कीमत 139 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई थी। अब यह 78 डॉलर के आसपास रह गई है। इसके बावजूद देश में पेट्रोल-डीजल की कीमत में कोई बदलाव नहीं हुआ है। देश में ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने आखिरी बार पिछले साल अप्रैल में पेट्रोल-डीजल की कीमत में बदलाव किया था। मई में केंद्र ने पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी कम की थी। उसके बाद से देश में पेट्रोल-डीजल की कीमत में कोई बदलाव नहीं हुआ है।