चीन की अमेरिका से क्या हो गई कोई डील? रेयर अर्थ मैग्नेट को लेकर खूब लुटा रहा प्यार, लेकिन भारत को दुत्कार

Updated on 21-07-2025 02:03 PM
नई दिल्ली: रेयर अर्थ मैग्नेट के निर्यात को लेकर चीन का दोहरा रवैया सामने आया है। रॉयटर्स की खबर के मुताबिक मई के मुकाबले जून में चीन ने अमेरिका को रेयर अर्थ मैग्नेट का निर्यात भारत से ज्यादा किया है। रेयर अर्थ मैग्नेट का इस्तेमाल इलेक्ट्रिक गाड़ियों और पवन टर्बाइनों समेत कई इलेक्ट्रोनिक डिवाइस में किया जाता है। अमेरिका को एक्सपोर्ट में तेजी चीन के साथ हुए एक व्यापार समझौते के बाद आई है।

जनरल एडमिनिस्ट्रेशन ऑफ कस्टम्स के आंकड़ों के अनुसार, चीन से अमेरिका को होने वाला रेयर अर्थ मैग्नेट का निर्यात जून में 353 मीट्रिक टन तक पहुंच गया। मई की तुलना में यह 660% की भारी वृद्धि है। मतलब, मई में जितना निर्यात हुआ था, जून में उससे सात गुना ज्यादा हुआ। वहीं दूसरी ओर भारत को एक्सपोर्ट मात्र 172 मीट्रिक टन रहा। मई की तुलना में इसमें मात्र 14 फीसदी की तेजी रही।

क्यों बढ़ा अमेरिका को निर्यात?

अमेरिका को निर्यात में उछाल जून में हुए कुछ समझौतों के बाद आया है। इन समझौतों में दुर्लभ पृथ्वी खनिजों और चुंबकों के शिपमेंट से जुड़े मुद्दों को सुलझाया गया। चिप बनाने वाली कंपनी एनवीडिया (Nvidia) भी चीन को अपने H20 AI चिप्स की बिक्री फिर से शुरू करने की योजना बना रही है। यह सब समझौते का हिस्सा है।

किस देश को कितना निर्यात?

चीन ने जून में रेयर अर्थ मैग्नेट का सबसे ज्यादा निर्यात जर्मनी को किया। चीन ने जर्मनी को 764 मीट्रिक टन रेयर अर्थ मैग्नेट का निर्यात किया। मई के मुकाबले इसमें 267 फीसदी की तेजी आई।

निर्यात में सबसे ज्यादा वृद्धि पोलैंड को हुई है। चीन ने पोलैंड को जून में मई के मुकाबले 738 फीसदी ज्यादा रेयर अर्थ मैग्नेट का निर्यात किया। इसके बाद अमेरिका रहा। वहीं सबसे ज्यादा निर्यात (फीसदी में) के मामले में टॉप 10 देश में भारत सबसे नीचे रहा।

अप्रैल में रोका था निर्यात

चीन दुर्लभ पृथ्वी चुंबकों का 90% से ज्यादा उत्पादन करता है। उसने अप्रैल की शुरुआत में कुछ रेयर अर्थ मेटल्स के निर्यात पर बैन लगा दिया था। यह कदम अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ के जवाब में उठाया गया था।

निर्यात लाइसेंस लेने में लगने वाले समय के कारण अप्रैल और मई में शिपमेंट में भारी गिरावट आई। इससे भारत और अमेरिका समेत दुनिया भर में सप्लाई चेन गड़बड़ा गई। चीन के बाहर कुछ ऑटोमोबाइल कंपनियों को दुर्लभ पृथ्वी की कमी के कारण उत्पादन रोकना पड़ा। इसमें भारतीय कंपनियां भी शामिल हैं।


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