
प्रतिक्रिया स्वरुप कार्पोरेट समूह ने कैनेडियन फर्म, रिपोर्ट के प्रमुख लेखक नीरज मोंगा और सह-लेखक नितिन मंगल, जो कि चार्टर्ड अकाउंटेंट होने के साथ-साथ रिसर्च एनालिस्ट भी है, उनके विरुद्ध दो अलग-अलग एफआइआर दर्ज करवाई। इनमें फिरौती मांगने, धमकाने, धोखाधड़ी, मानहानि आदि के आरोप लगाए गए थे। प्रकरण दर्ज होने के बाद नितिन मंगल को कई दिन जेल में बिताना पड़े थे।
इस मामले में हाल ही में न्यायालय ने आदेश जारी किया है। इसमें कहा है कि मंगल पर लगाए आरोपों के संबंध में पुलिस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सकी है। एडवोकेट अमित दुबे ने बताया कि कोर्ट ने यह भी पाया कि पुलिस रिपोर्ट में जिस व्यक्ति से फिरौती की मांग करना बताया गया वह कभी पुलिस के सामने आया ही नहीं। कोर्ट ने इस बात पर भी नाराजगी जताई कि पुलिस ने अनुसंधान के दौरान जब्त 9 हजार दस्तावेज नष्ट कर दिे जबकि वे प्रकरण में महत्वपूर्ण साक्ष्य थे।