भोपाल में बिखरे दक्षिण भारतीय कला- संस्कृति के रंग, केरल-फेस्ट का रंगारंग आगाज

Updated on 08-06-2024 12:18 PM
 भोपाल। बिट्टन मार्केट का मैदान शुक्रवार शाम से केरल की कला- संस्कृति के रंग में रंग गया। यूनाइटेड मलयाली एसोसिएशन की 40वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित तीन दिवसीय केरल फेस्ट और सांस्कृतिक समारोह का शुभारंभ शुक्रवार शाम को हुआ। मालयाली समाज द्वारा आयोजित समारोह में जहां पहले दिन सभी स्टाल खुल नहीं पाए, वहीं रात तक गीत-संगीत और नृत्य की महफिल सजी रही। बड़ी संख्या में शहरवासी केरल की वर्षों पुरानी कला एवं शिल्प के हुनर से शहरवासी रूबरू हुए। फूड लवर्स ने केरल के लजीज व्यंजनों का लुत्फ उठाया।

कार्यक्रम के पहले दिन प्रतिभालय आर्ट्स अकादमी की नृत्यांगनाओं द्वारा शास्त्रीय नृत्य की प्रस्तुति दी गई, जिसे मंजू और विशाल हतवलने द्वारा कोरियोग्राफ किया गया। इसके बाद केरल के लोक नृत्यों की प्रस्तुति हुई। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रदेश के सहकारिता एवं खेल व युवा कल्याण मंत्री विश्वास सारंग ने किया। देर रात तक चले कार्यक्रम में भोपाल में निवासरत दक्षिण भारत के लोगों ने बड़ी संख्या में सहभागिता की।

केरल के कला रूपों को देखने का मौका मिला

शास्त्रीय प्रस्तुति में नृत्यकारों की अभिव्यक्तिपूर्ण गतियां और भावपूर्ण कहानियों ने दर्शकों को मोहित कर दिया, जिससे भारतीय शास्त्रीय नृत्य रूपों की शाश्वत सुंदरता का प्रदर्शन हुआ। इसके बाद कला रूपांगल शीर्षक के तहत पारंपरिक केरली कला रूपों का एक जीवंत प्रदर्शन प्रस्तुत किया गया। इस खंड में केरल की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दर्शाने वाले प्रदर्शनों को समर्पित किया गया। सांस्कृतिक आयोजन के मुख्य आकर्षण में केएफ थामस गुरुक्कल द्वारा चलाई गई चुंबकीय कला का प्रदर्शन था। कड़थनादन कलरी संगम के मुख्य मास्टर ट्रेनर थामस गुरुक्कल ने उपस्थित दर्शकों को अपने व्यापक ज्ञान और उत्साह से प्रेरित किया। कलरिप्पयाट्टु विधा में यह प्रदर्शन 13 कुशल कलाकारों की एक रोमांचक प्रस्तुति थी। प्रदर्शन ने केवल कलरिप्पयाट्टु के शारीरिक पहलुओं का ही नहीं, बल्कि इसके दार्शनिक और आध्यात्मिक आयामों का भी प्रदर्शन किया।

इसके बाद कला-जनजातीय अध्ययन अनुसंधान प्रशिक्षण केंद्र के माणिक्यकल्लु का प्रदर्शन भी हुआ, जिसमें उपस्थित लोगों को केरल के पारंपरिक कला रूपों के मोहक प्रदर्शनों का आनंद लेने का अवसर मिला। इसमें प्रमुख रूप से प्रसिद्ध तेय्यम नृत्य और ग्रीष्मकालीन नृत्य मायूर नृत्य (पीकाक डांस) शामिल थे, जो अपनी शानदार परिधानों और प्रभावशाली प्रस्तुतियों के लिए जाने जाते हैं।


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