आरजीपीवी में कैंटीन संचालन निरस्त, अनुबंध भी तोड़ा

Updated on 25-03-2026 11:53 AM
भोपाल, भोपाल के राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (आरजीपीवी) की मुख्य कैफेटेरिया की सब्जी में छिपकली निकलने के मामले में कैंटीन संचालन तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया है। छात्रों की शिकायतों, विरोध प्रदर्शन और जांच समिति की रिपोर्ट में गंभीर अनियमितताएं सामने आने के बाद यह कार्रवाई की गई।

रिपोर्ट में भोजन की गुणवत्ता खराब होने, संदिग्ध वस्तु मिलने और स्वच्छता नियमों के उल्लंघन की पुष्टि हुई है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने साफ किया है कि अब कैंटीन संचालन पूरी तरह बंद रहेगा और भविष्य में नई व्यवस्था सख्त मानकों के साथ लागू की जाएगी।

छिपकली मिलने के दावे से शुरू हुआ विवाद

आरजीपीवी की मुख्य कैंटीन उस समय विवादों में आई जब छात्रों ने आरोप लगाया कि उन्हें परोसी गई शिमला मिर्च की सब्जी में मरी हुई छिपकली मिली। यह घटना डिनर के दौरान हुई, जब एक छात्र को सब्जी का स्वाद संदिग्ध लगा और जांच करने पर उसमें छिपकली जैसी वस्तु दिखाई दी। इसके बाद कैंटीन में हड़कंप मच गया और अन्य छात्र भी मौके पर जुट गए।

जांच रिपोर्ट में मिली अनियमितताओं की पुष्टि

मामले को गंभीरता से लेते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने जांच समिति गठित की। समिति की रिपोर्ट में भोजन में संदिग्ध वस्तु मिलने की पुष्टि के साथ ही साफ-सफाई और स्वास्थ्य मानकों के उल्लंघन की बात सामने आई। इससे यह स्पष्ट हो गया कि कैंटीन संचालन में गंभीर लापरवाही बरती जा रही थी।

जांच रिपोर्ट के आधार पर आरजीपीवी प्रशासन ने सख्त कार्रवाई करते हुए कैंटीन संचालक का अनुबंध तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया। यह कार्रवाई मध्यप्रदेश भंडार क्रय एवं सेवा उपार्जन नियमों के तहत की गई है। उप कुलसचिव (प्रशासन) द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि आगामी आदेश तक कैंटीन संचालन पूरी तरह बंद रहेगा।

कर्मचारी ने किया इनकार, वीडियो हुआ वायरल

छात्रों ने जब इसकी शिकायत कैंटीन कर्मचारियों से की तो कथित तौर पर इसे छिपकली मानने से इनकार कर दिया गया और शिमला मिर्च का टुकड़ा बताया गया। हालांकि, मौके पर मौजूद छात्रों ने पूरी घटना का वीडियो रिकॉर्ड कर लिया, जो बाद में सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो सामने आने के बाद कैंटीन की व्यवस्था और भोजन की गुणवत्ता को लेकर सवाल तेज हो गए।

पहले से उठते रहे हैं गुणवत्ता पर सवाल

छात्रों का कहना है कि यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी कई बार कैंटीन के खाने की गुणवत्ता और साफ-सफाई को लेकर शिकायतें की जा चुकी हैं। बावजूद इसके, प्रबंधन स्तर पर कोई ठोस सुधार नहीं किया गया। इस घटना के बाद छात्रों ने इसे स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ बताते हुए सख्त कार्रवाई की मांग की।

विरोध प्रदर्शन और ज्ञापन के बाद हरकत में आया प्रशासन

घटना के बाद छात्रों ने वाइस चांसलर कार्यालय पहुंचकर विरोध दर्ज कराया और ज्ञापन सौंपा। एबीवीपी समेत अन्य छात्र संगठनों ने भी मामले को उठाया। बताया गया कि यह कैंटीन विश्वविद्यालय की सबसे बड़ी और मुख्य कैंटीन है, जहां रोजाना करीब 500 छात्र भोजन करते हैं। ऐसे में इस तरह की लापरवाही को गंभीर माना गया।



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