वसुंधरा में बिल्डरों ने सिंगल यूनिट पर बना दिए 5 हजार मल्टीस्टोरी फ्लैट, सर्वे में हुआ चौंकाने वाला खुलासा

Updated on 08-08-2023 02:37 PM
नई दिल्ली: दिल्ली से सटे वसुंधरा में बिल्डरों ने सिंगल यूनिट पर बड़े-बड़े अपार्टमेंट्स बना दिए हैं। हाल ही में हुए एक सर्वेक्षण में इसका खुलासा हुआ है। बीते दिनों वसुंधरा के सेक्टर-1 में अवैध रूप से बनाए गए फ्लैटों का पता चला था। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने वसुंधरा के सेक्टर-1 में अवैध रूप से बनाए गए फ्लैटों को गिराने का आदेश दिया है। यहां आवास विकास से टू बीएचके के 9 फ्लैट का नक्शा स्वीकृत था, लेकिन बिल्डर ने वन बीएचके के 23 फ्लैट बना दिए। कोर्ट के आदेश के बाद आवास विकास ने बिल्डिंग पर नोटिस चस्पा कर सभी फ्लैट खाली करने को कहा था। अब वसुंधरा टाउनशिप में अवैध निर्माणों की पहचान करने के लिए मेरठ मंडल आयुक्त के निर्देश पर किए गए एक स्वतंत्र सर्वेक्षण किया गया है। इसमें में कम से कम 5,000 बहुमंजिला इमारतों की पहचान की गई है जो सिंगल यूनिट वाले प्लॉट पर बनाए गए हैं।

सरकार को भेजी जाएगी रिपोर्ट

यूपी हाउसिंग बोर्ड के अधीक्षण अभियंता राकेश चंद्रा के मुताबिक, डीसी कार्यालय को भूमि उपयोग के उल्लंघन पर कई शिकायतें मिलने के बाद गठित समिति द्वारा तैयार रिपोर्ट कार्रवाई के लिए राज्य सरकार को भेजी जाएगी। उन्होंने बताया कि सर्वेक्षण अभी भी जारी है और पहले से ही 5,000 से अधिक भूखंडों की पहचान की गई है जहां अवैध निर्माण हुए हैं। अंतिम रिपोर्ट राज्य सरकार को भेजी जाएगी और उसके निर्देश के आधार पर गलती करने वाले डेवलपर्स के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इसमें बड़े पैमाने पर कार्रवाई हो सकती है।

इन सेक्टरों में बनाए गए हैं फ्लैट

वसुंधरा विकास समिति के संरक्षक यूपी गर्ग के मुताबिक, इनमें से अधिकतर उल्लंघन सेक्टर 2, 3, 5, 10, 10 ए, 12, 14 और 16 में किया गया है। अवैध निर्माणों का हमेशा पानी, जल निकासी और पार्किंग जैसी सुविधाओं पर सीधा और खराब असर पड़ता है। उन्होंने कहा कि इसके लिए यूपी हाउसिंग बोर्ड के अधिकारी और डेवलपर्स समान रूप से जिम्मेदार हैं।

वसुंधरा विकास समिति के संरक्षक यूपी गर्ग के मुताबिक, कई छोटे डेवलपर्स न केवल बोर्ड की नाक के नीचे बहुमंजिला इमारतें बनाने में न सिर्फ कामयाब रहे हैं, बल्कि इन फ्लैटों को बेचने में भी सफल रहे हैं। वसुंधरा विकास समिति के संरक्षक यूपी गर्ग ने कहा कि इतने बड़े पैमाने पर उल्लंघन, वह भी इतने वर्षों में, बोर्ड अधिकारियों की मिलीभगत के बिना नहीं हो सकता था। इसकी जांच की जरूरत है।

डेवलपर्स पर हो कार्रवाई

कुछ साल पहले ऐसी एक यूनिट खरीदने वाले स्थानीय निवासी अनीश के मुताबिक, इसके लिए घर खरीदने वालों को दोष देने की जगह ऐसे डेवलपर्स पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं पीड़ित घर खरीदारों को मुआवजा दिया जाना चाहिए। दूसरी ओर, यूपी हाउसिंग बोर्ड के एक अधिकारी ने कहा कि पिछले साल उन्होंने भारतीय रिज़र्व बैंक सहित बैंकों को पत्र लिखकर आग्रह किया था कि वे होम लोन देने से पहले बोर्ड के साथ फ्लैटों की वैधता की पुष्टि करें।


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