
15 नवंबर (15 november) को मध्यप्रदेश में बिरसा मुंडा की जयंती के मौके पर सामान्य अवकाश (general holiday) घोषित किया गया है। इस दौरान सभी सरकारी दफ्तरों में और स्कूल-कालेजों में अवकाश रहेगा। पहले यह अवकाश सरकारी कैलेंडर में नहीं दी गई थी। जिसके बाद कैलेंडर में भी सुधारने के आदेश जारी किए गए थे। अब आनलाइन सरकारी कैलेंडर में भी संशोधन कर दिया गया है। सरकारी कोषालयों और उपकोषालयों में यह अवकाश नहीं रहेगा। इसके अलावा प्रदेश के सरकारी दफ्तरों में फाइव डे वीक काम होता है। इसलिए दो शनिवार और दो रविवार की छुट्टी बाकी है। जबकि कुछ स्कूलों में 14 नवंबर चिल्ड्रन्स-डे की भी छुट्टी है।
इससे पहले 15 नवंबर की बिरमुंडा जयंती का अवकाश घोषित होने के बावजूद सरकारी कैलेंडर में इसे नहीं दिखाया गया था। इससे शासकीय कर्मचारियों में भ्रम की स्थिति बन रही थी। अब कैलेंडर में सामान्य अवकाश घोषित होने के बाद 15 नवंबर को भी अवकाश रहेगा।
जानिए कौन हैं बिरसा मुंडा
बिरसा मुंडा को लोग कई नामों से पुकारते हैं। उन्हें धरती बाबा, महानायक और भगवान भी माना जाता है। यह नाम ऐसे ही उन्हें नहीं मिले। अंतिम सांस तक अंग्रेजों से अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ने वाले और प्रकृति को भगवान की तरह पूजने वाले बिरसा मुंडा का जन्म 14 नवंबर 1875 में झारखंड के खूंटी जिले में हुआ था। आदिवासी इन्हें अपना महानायक मानते हैं। आदिवासी परिवार में जन्मे बिरसा के पिता सुगना पूर्ती और मां करमी पूर्ती निषाद जाति से तालुल्क रखते थे। बिरसा का पूरा जीवन आदिवासियों को उनके अधिकारों के लिए जागरूक करने और आदिवासियों के हित के लिए अंग्रेजों से संघर्ष करते हुए बीता। अपनी हार से गुस्साए अंग्रेजों ने बिरसा मुंडा को जहर दे दिया था। 9 जून 1900 को रांची कारागार में उन्होंने अंतिम सांस ली। रांची के डिस्टलरी पुल के पास बिरसा मुंडा की समाधि बनी है। मध्यप्रदेश में भी आदिवासी इलाकों में बिरसा मुंडा को भगवान की तरह पूजा जाता है। केंद्र सरकार ने 15 नवंबर को इनकी जयंती के मौके पर जनजातीय गौरव दिवस मनाने का फैसला लिया था।