नेपाल चुनाव में बालेंद्र शाह की धमाकेदार जीत, क्या Gen-Z के अरमान पूरे होंगे?

Updated on 09-03-2026 03:58 PM
नेपाल में Gen-Z आंदोलन के बाद हुए संसदीय चुनाव के नतीजों ने देश की राजनीति में क्रांतिकारी बदलाव का संकेत दिया। इससे पहले 2006 की पहली जनक्रांति के बाद हुए व्यापक शांति समझौते के आधार पर 2008 में संविधान सभा के चुनाव कराए गए थे। तब पुष्प कमल दाहल ‘प्रचंड’ की पार्टी कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (माओ‌वादी केंद्र) को जनता का अटूट समर्थन मिला था। मगर वह लोगों की अपेक्षाओं को पूरा नहीं कर सके। 2015 तक नेपाल एक समावेशी संविधान भी नहीं बना पाया। संविधान लागू होने के बाद भी राजनीतिक नेतृत्व में स्थायित्व नहीं आया और कई प्रधानमंत्री बदलते रहे।

दूसरी बड़ी जनक्रांति

पिछले साल सितंबर में हुए Gen-Z आंदोलन को नेपाल की दूसरी बड़ी जनक्रांति माना जा रहा है। इसके बाद पहली बार पिछले हफ्ते चुनाव हुए, जिसमें पारंपरिक दलों के खिलाफ नेपालियों का गुस्सा साफ दिखा। इस बार चुनाव में रैपर से राजनेता बने बालेंद्र शाह (बालेन) की राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) बहुमत बनाती दिख रही है।
RSP ने 90 में से 72 सीटों पर जीत दर्ज की है। इसके अलावा, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूनिफाइड मार्क्सवादी-लेनिनवादी) देश की दूसरी और नेपाली कांग्रेस तीसरी सबसे बड़ी पार्टी बनने वाली है। मगर, मधेसी दल सफल होते नहीं दिख रहे।

वादों से मिला साथ

RSP के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार बालेन ने अपने प्रमुख प्रतिद्वंद्वी और चार बार प्रधानमंत्री रह चुके के पी शर्मा ओली को करीब 50,000 वोटों ने हरा दिया। बालेन काठमांडू के मेयर रह चुके हैं और युवाओं में लोकप्रिय हैं। भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने और व्यवस्था बदलने के वादों ने Gen-Z का साथ दिलाया।

इस चुनाव में इस बार फेसबुक, यूट्यूब का काफी प्रभाव पड़ा, जिससे युवाओं की भागीदारी बढ़ी और एंटी एस्टैब्लिशमेंट भावना मजबूत हुई। ओली सरकार ने 26 सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म पर प्रतिबंध लगाया था, जिससे Gen-Z ने आंदोलन किया।

जनादेश को ठेस

चुनाव से पहले नेपाल में राजनीतिक हालात काफी तनावपूर्ण थे। ओली की पार्टी और नेपाली कांग्रेस के गठबंधन पर Gen-Z आंदोलन दबाने के लिए हिंसा के आरोप लगे। सोशल मीडिया पर प्रतिबंध और चीन के साथ ओली की बढ़ती नजदीकी से एक वक्त अमेरिका भी नाराज हो गया। दूसरी ओर, प्रचंड और ओली जैसे पुराने नेताओं की धाक कम होने लगी और उनकी आपसी साझेदारी से जनता ऊब गई।

2022 के चुनाव में नेपाली कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनी। फिर भी प्रधानमंत्री पहले प्रचंड बने और बाद में ओली, जिससे जनादेश को ठेस पहुंची। प्रधानमंत्री रहते हुए ओली पर भ्रष्ट और निरंकुश रवैये के आरोप भी लगे। चुनाव से पहले पार्टी के अंदर भी संकट बढ़ गया, जब शेर बहादुर देउबा की जगह गगन थापा को नेतृत्व दिया गया और देउबा ने इसे अदालत में चुनौती दे दी। इस आंतरिक फूट का फायदा बालेन को मिला और उनका चुनावी रास्ता आसान हो गया।

राजनीतिक पीढ़ी परिवर्तन

इस बार पारंपरिक दलों की जगह नई उभरती RSP और बालेन शाह जैसे युवा नेता को समर्थन मिला। यह देश में पीढ़ीगत परिवर्तन का संकेत है। अब सवाल है कि क्या RSP बड़ा बदलाव ला पाएगी या प्रचंड सरकार की तरह जनता का भरोसा खो देगी। 2006 के बाद जनता को समानता, गणतंत्र और विकास की उम्मीद थी, लेकिन अवसरवादी राजनीति, भ्रष्टाचार, परिवारवाद की चुनौतियां और मधेशी उपेक्षा ने अस्थिरता बढ़ाई। ऐसे में बालेन का मधेशी मूल वहां के लोगों के लिए नई उम्मीद बना है।

बालेन शाह की चुनौतियां

नई सरकार के सामने कई चुनौतियां होंगी। बालेन सहित अधिकांश नए सांसदों के पास राजनीति और सरकार चलाने का अधिक अनुभव नहीं है। उन्हें नौकरशाही के साथ तालमेल बैठाते हुए जनता की उम्मीदों को पूरा करना होगा। चुनावी वादे, खासकर रोजगार देना सरकार के लिए आसान नहीं होगा।
विदेश में बढ़ते माइग्रेशन विरोध और खाड़ी देशों की अनिश्चित स्थिति के कारण कई नेपाली अपने देश लौट सकते हैं। RSP मूल रूप से रबि लामिछाने की पार्टी है और बालेन सहित कई नेता हाल ही में इसमें शामिल हुए हैं।

कई मुद्दे संवेदनशील

लामिछाने पर लगे भ्रष्टाचार के आरोप भी नई सरकार पर दबाव बना सकते हैं और पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर विवाद खड़ा हो सकता है। इसके अलावा संविधान संशोधन, संघीय व्यवस्था और सनातन धर्म जैसे मुद्दों से राजनीतिक बहस बढ़ सकती है।

नई सरकार को भारत और चीन के साथ संतुलित संबंध बनाए रखने होंगे, क्योंकि नेपाल के भारत के साथ विशेष रिश्ते, सीमा और जल विवाद जैसे मुद्दे भी जुड़े हैं। यदि सरकार संतुलित नीति अपनाए और विकास व ऊर्जा क्षेत्र में भारत के साथ सहयोग बढ़ाए, तो इससे नेपाल की स्थिरता और क्षेत्रीय संतुलन दोनों को लाभ मिल सकता है।

अन्य महत्वपुर्ण खबरें

 08 September 2026
इस्लामाबाद: आतंकवादी गतिविधियों में उम्र कैद की सजा काट रहे कश्मीरी अलगाववादी यासीन मलिक की पाकिस्तानी पत्नी मुशाल हुसैन मलिक ने पति की रिहाई की गुहार लगाई है। मुशाल हुसैन…
 08 September 2026
तेल अवीव/नई दिल्ली: भारतीय वायुसेना जोधपुर एयरफील्ड में इस महीने 9 से 22 सितंबर तक कई देशों के साथ संयुक्त युद्धाभ्यास करने वाली है। इसमें शामिल होने के लिए जापान…
 08 September 2026
तेल अवीव: इजरायल के पूर्व प्रधानमंत्री नेफ्ताली बेनेट ने आरोप लगाया है कि 7 अक्टूबर 2023 को हुए हमले को लेकर प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को पहले से जानकारी थी। नेफ्ताली…
 08 September 2026
पेरिस: फ्रांस की राजधानी पेरिस में विवाद के पास मशहूर एफिल टावर को फिलहाल पर्यटकों के लिए बंद कर दिया गया है। एफिल टावर को बंद करने का फैसला कर्मचारियों…
 05 September 2026
काठमांडू: रसुवा में आए 'हिमालयी सुनामी' और 1200 से ज्यादा लोगों की मौत के बाद नेपाल में मुआवजे की मांग पर बालेन शाह सरकार में मतभेद की रिपोर्ट्स हैं। नवभारत…
 05 September 2026
मेक्सिको सिटी: मेक्सिको में वैज्ञानिकों के एक अनोखे प्रयोग ने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया है। 17 साल पहले मवेशियों के चराने से बंजर हो चुके एक चरागाह (Mexico…
 05 September 2026
इस्लामाबाद: पाकिस्तान के टीवी पत्रकार हामिद मीर ने कहा है कि अगर अगला युद्ध होता है तो पाकिस्तान, भारत और इजरायल से परमाणु हथियार छीन लेगा। हामिद मीर पाकिस्तान के…
 05 September 2026
वॉशिंगटन: अमेरिका की गिनती दुनिया की महाशक्तियों में होती है। इसका कारण सिर्फ अमेरिकी अर्थव्यवस्था ही नहीं, बल्कि उसकी सैन्य ताकत भी है। लेकिन, क्या हो जब कोई कहे कि…
 04 September 2026
ढाका: भारत और बांग्लादेश के बीच गंगा जल बंटवारे को लेकर संधि इस साल 12 दिसंबर को खत्म होने वाली है। अभी तक इस संधि को आगे बढ़ाने के लिए…
Advt.