त्र्यंबकेश्‍वर मंदिर में 'हरी चादर' चढ़ाने की कोशिश, ज्ञानवापी केस में हिंदू पक्ष के वकील ने जो कहा सुन लीजिए

Updated on 17-05-2023 06:38 PM
नई दिल्ली: नासिक के त्र्यंबकेश्वर मंदिर में दूसरे समुदाय के कुछ लोगों ने चादर चढ़ाने की कोशिश की। इसका वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है। मंदिर प्रबंधन के अनुसार, त्र्यंबकेश्वर भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है। ऐसे में सिर्फ हिंदुओं को मंदिर में प्रवेश करने की अनुमति है। भगवान शिव पर हरी चादर चढ़ाने की इस कोशिश से हिंदू काफी नाराज हैं। इस पर बहस भी गरम हो गई है। दलील यह दी जा रही है कि जब हिंदू दरगाहों में जाकर चादर चढ़ा सकते हैं तो मुस्लिम मंदिरों में क्‍यों नहीं जा सकते हैं। इस पर ज्ञानवापी मामले में हिंदू पक्ष के वकील विष्‍णु शंकर जैन की प्रतिक्रिया भी आई है। हमारे सहयोगी चैनल टाइम्‍सनाउ नवभारत में एक डिबेट में शामिल होकर उन्‍होंने इस पर अपनी राय जाहिर की।

त्र्यंबकेश्वर मंदिर में हरी चादर चढ़ाने की कोशिश पर एक पक्ष कई तरह की दलीलें देने में लगा है। उसका कहना है जब अजमेर शरीफ, ताजमहल और दूसरी दरगाहों में हिंदुओं के जाने पर मनाही नहीं है तो मुस्लिमों के त्र्यंबकेश्वर मंदिर जाने में क्‍यों ऐतराज जताया जा रहा है। इसका जवाब ज्ञापवापी केस में हिंदू पक्ष के वकील विष्‍णु शंकर जैन ने दिया है। उन्‍होंने कहा है कि मंदिर में हर कोई प्रवेश नहीं कर सकता है। आज अगर कोई मंदिर में जाना चाहता है तो उसे सनातन में विश्‍वास करना पड़ेगा। उसे भगवान शिव में आस्‍था पैदा करनी होगी। इसके लिए मंदिर के मुख्‍य देवता के पूजा-अर्चना के नियमों का पालन करना होगा। यूं ही कोई भी मंदिर नहीं जा सकता है।

मंद‍िर में व‍िराजमान देवता का न‍ियम चलेगा
विष्‍णु शंकर जैन बोले, अगर कोई मंदिर आना चाहता है तो उसका स्‍वागत है। लेकिन, मंदिर में वहां विराजमान देवता का नियम चलेगा। कोई बाहरी इसके लिए नियम नहीं बना सकता है। कोई भी भगवान शिव का आदर कर सकता है। लेकिन, वहां आदर के नाम पर हरी चादर नहीं चढ़ा सकता है। कई मंदिरों में पहले से ही गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर मनाही है। भगवान शिव का त्र्यंबकेश्वर मंदिर भी उनमें शामिल है।

क्‍या है त्र्यंबकेश्वर मंदिर मामला
त्र्यंबकेश्वर मंदिर से जुड़ा एक वीडियो वायरल है। इसमें कुछ लोग सिर पर चादर रखकर मंदिर के गेट में प्रवेश करने की कोशिश करते हैं। यह और बात है कि गार्ड उन्हें रोक देते हैं। इसी दौरान बहस होने लगती है। इसके बाद उन्हें वापस लौटना पड़ता है। मंदिर ट्रस्ट ने पुलिस में इसकी शिकायत की है। इसके आधार पर आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज हुआ है। मंदिर प्रबंधन के अनुसार, सिर्फ हिंदुओं को मंदिर में प्रवेश करने की अनुमति है। यह भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है। एक साल में यह त्र्यंबकेश्वर मंदिर में दूसरे समुदाय के लोगों के घुसने की दूसरी घटना है। पिछले साल कुछ लोग मुख्य प्रवेश द्वार से त्र्यंबकेश्वर मंदिर परिसर में प्रवेश कर गए थे।

अन्य महत्वपुर्ण खबरें

 22 September 2026
पूनम पाण्डे: पेपर लीक के खिलाफ युवाओं ने जंतर-मंतर पर आंदोलन किया, सरकार से सवाल पूछे और फिर दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्रसंघ चुनाव (DUSU) में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का छात्र संगठन,…
 22 September 2026
नई दिल्ली: एक इमारत गिरी और 7 लोगों की जान चली गई... इस हादसे ने सिर्फ दिल्ली के सत्य निकेतन को नहीं, बल्कि देश के तेजी से फैलते शहरों में…
 22 September 2026
नई दिल्ली: राजस्थान का जोधपुर एयरबेस जल्द ही दुनिया की कई प्रमुख वायु सेनाओं की ताकत का गवाह बनने वाला है। यहां 26 सितंबर से 12 अक्टूबर तक मल्टीनेशनल एयर…
 22 September 2026
नई दिल्ली: क्या कानूनी प्रक्रिया पूरी कर गोद लिए गए बच्चे को सालों बाद वापस किसी संस्था को सौंपा जा सकता है? अगर बच्चा बड़ा होने के साथ इतना आक्रामक…
 22 September 2026
नई दिल्ली: सिंधु जल समझौता रुकने से पाकिस्तान में बहुत ही छटपटाहट है। उसने इस समझौते को फिर से शुरू करवाने के लिए भारत पर दबाव बनाने के अपने सारे…
 22 September 2026
सी.आर. पाटिल, नई दिल्ली: जल हमें उन तरीकों से जोड़ता है, जिनमें बहुत कम दूसरे संसाधन जोड़ पाते हैं। नदियां प्रशासनिक सीमाओं को नहीं पहचानतीं। भूजल के स्रोत कई समुदायों…
 22 September 2026
नई दिल्ली: दिल्ली में वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन यानी SIR के दौरान कई चौंकाने वाले मामले सामने आए हैं। पुरानी दिल्ली के 125 साल के वोटर श्याम मुखिजा…
 21 September 2026
BRICS के बढ़ते प्रभाव, भारत-चीन संबंधों, ऊर्जा सुरक्षा और UNSC में सुधार जैसे मुद्दों पर दुनिया की नजर है। ऐसे में भारत के लिए इस मंच की बदलती भूमिका कितनी…
 21 September 2026
नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल में स्पेशल इंटेंसिव रिविजन ( SIR ) के बाद मतदाता सूची से हटाए गए अनगिनत वोटर शायद एक दशक तक वोट न दे पाएं। ऐसा इसलिए…
Advt.