अमेरिका और इजरायल ने शुरू की जंग, फायदा उठाने लगा रूस, ईरान युद्ध से पुतिन की हो गई बल्ले-बल्ले

Updated on 11-03-2026 01:38 PM
मॉस्को: अमेरिका और इजरायल के ईरान पर लगातार हमलों के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस के अपने समकक्ष व्लादिमीर पुतिन से फोन पर बात की है। इसमें भी खास यह है कि दोनों के बीच एक सप्ताह में दो बार बात हुई है, जो अमेरिका की परेशानी को जाहिर करता है। दिलचस्प बात है कि रूस के राष्ट्रपति पुतिन खुद को इंटरनेशनल पीसमेकर के रूप में पेश कर रहे हैं। यह वही दावा है, जो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दो सप्ताह पहले तक खुद के बारे में करते रहे थे।

ईरान युद्ध रूस के लिए मौका

एक्सपर्ट का मानना है कि ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमला रूस के लिए एक शानदार मौके के रूप में आया है। रूस के लिए यह खाड़ी में अपनी पहचान बनाने और एक असरदार ताकत के रूप में पेश करने का मौका है। दो सप्ताह पहले तक ट्रंप यूक्रेन युद्ध को खत्म कराने में मध्यस्थता कर रहे थे, लेकिन अब स्थितियां उलट गई हैं। अब मॉस्को ने अमेरिका और ईरान के झगड़े में बीच-बचाव का ऑफर किया है।
क्रेमलिक के मुताबिक, ट्रंप के साथ सोमवार को हुई टेलीफोन पर बातचीत में पुतिन ने ईरान युद्ध के डिप्लोमैटिक समाधान के लिए कई विचार सामने रखे, जो खाड़ी देशों के नेताओं, ईरानी राष्ट्रपति और दूसरे देशों के नेताओं से संपर्क पर आधारित थे। खास बात है कि क्रेमिलन जहां तेजी से तनाव कम करने की मांग कर रहा है, वहीं उसने यूक्रेन के खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रखी है।

ट्रंप के साथ रिश्ते मजबूत करने की चाल

पुतिन की सक्रियता की एक वजह यह भी है कि वे ट्रंप के साथ अच्छे कामकाजी रिश्ते बनाए रखना चाहते हैं। पुतिन का मानना है कि ट्रंप प्रशासन के साथ अच्छे रिश्ते यूक्रेन में मॉस्को के युद्ध के लिए फायदेमंद है। यही वजह है कि पुतिन ने ईरान के लिए पक्का समर्थन तो जाहिर किया है, लेकिन ट्रंप की निजी बुराई से बचे रहे हैं। एक्सपर्ट का कहना है कि यह लड़ाई पुतिन के लिए दूसरे मौके उपलब्ध कराती है।

ईरान युद्ध के चलते दुनिया भर में तेल की कीमतों में उछाल आ रहा है, इसका रूसी सरकार के रेवेन्यू को फायदा मिला है। इससे रूस को यूक्रेन युद्ध के लिए फंडिंग जारी रखने में मदद मिलेगी। रूस का फेडरल बजट इस बात पर निर्भर करता है कि देश 59 डॉलर प्रति बैरल पर तेल एक्सपोर्ट करता है। प्रतिबंधों के चलते रूस को तेल बेचने में बहुत मुश्किल आ रही थी।

रूसी तेल की बाजार में एंट्री को मंजूरी

लेकिन इस सप्ताह खाड़ी में युद्ध के चलते जब कच्चा तेल अचानक बढ़कर लगभग 120 डॉलर प्रति बैरल हो गया तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में हड़कंप मच गया। दुनिया भर में तेल को लेकर दबाव बढ़ने लगा, जिसके बाद ट्रंप ने सुझाव दिया है कि कमी को पूरा करने के लिए अमेरिका कुछ देशों पर तेल से जुड़े बैन हटा देगा। इतना ही नहीं, भारत के लिए 30 दिन की छूट की घोषणा भी कर दी गई है।

बीबीसी के रूसी एडिटर स्टीव रोसेनबर्ग ने लिखा है कि अगर रूस पर तेल प्रतिबंध कम किए जाते हैं, तो मॉस्को को और भी ज्यादा वित्तीय फायदा होने की उम्मीद हो सकती है। यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने ट्रंप ने ऐसा न करने की अपील की है और कहा कि यह कीव के लिए झटका होगा।

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