अडानी ने इस डील से पीछे किए हाथ, श्रीलंका में पोर्ट प्रोजेक्ट के लिए अब नहीं लेंगे अमेरिका की मदद

Updated on 11-12-2024 02:37 PM
नई दिल्ली: अमेरिकी कोर्ट में रिश्वत देने के आरोपों का सामना कर रहे गौतम अडानी ने एक काम से अपने हाथ पीछे कर लिए हैं। अडानी ग्रुप की कंपनी अडानी पोर्ट्स ने कहा है कि वह श्रीलंका में अपने एक पोर्ट प्रोजेक्ट में अब अमेरिका की मदद नहीं लेगी। कंपनी ने कहा है कि वह इस प्रोजेक्ट के लिए अपने ही संसाधनों का इस्तेमाल करेगी।
अडानी ग्रुप की कंपनी अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन (APSEZ) श्रीलंका में कोलंबो वेस्ट इंटरनेशनल टर्मिनल (CWIT) प्रोजेक्ट पर काम कर रही है। इस प्रोजेक्ट के लिए कंपनी की अमेरिकी कंपनी यूएस डेवलपमेंट फाइनेंस कॉरपोरेशन (DFC) के साथ 553 मिलियन डॉलर के लोन की बात चल रही थी। लेकिन अब अडानी पोर्ट ने लोन की इस रिक्वेस्ट को वापस ने लिया है।

पिछले साल हुई थी डील

APSEZ और DFC के बीच 553 मिलियन डॉलर के लोन की डील पिछले साल नवंबर में हुई थी। DFC के प्रवक्ता ने बताया कि लेन-देन को 2023 में मंजूरी दी गई थी, लेकिन कोई धनराशि वितरित नहीं की गई थी। मंजूरी के बाद स्थिति की समीक्षा की जा रही थी।

अब क्या करेगी कंपनी?

इकनॉमिक टाइम्स के मुताबिक अडानी पोर्ट्स ने मंगलवार देर रात इसकी जानकारी स्टॉक एक्सचेंज फाइलिंग में दी। कंपनी ने कहा कि उसने DFC से फंड का अपना अनुरोध वापस ले लिया है। कंपनी ने कहा कि वह इस प्रोजेक्ट के लिए अब आंतरिक संसाधनों का इस्तेमाल करेगी। इसके लिए इंटरनल सोर्स और कैपिटल मैनेजमेंट रणनीति अपनाई जाएगी।
कंपनी के मुताबिक श्रीलंका में CWIT प्रोजेक्ट का काम तेजी से चल रहा है। यहां नए टर्मिनल का काम चालू है। इसके अगले साल की शुरुआत तक चालू होने की उम्मीद है।

क्या है CWIT प्रोजेक्ट?

इस प्रोजेक्ट का निर्माण अडानी पोर्ट्स और श्रीलंकाई ग्रुप जॉन कील्स होल्डिंग्स की ओर से किया जा रहा है। इसके लिए अडानी पोर्ट्स ने श्रीलंका पोर्ट्स अथॉरिटी और जॉन कील्स होल्डिंग्स के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। यह प्रोजेक्ट सितंबर 2021 में शुरू हुआ था। इसका उद्देश्य कोलंबो पोर्ट की क्षमताओं का विस्तार करना है।

सीडब्ल्यूआईटी श्रीलंका का सबसे बड़ा और सबसे गहरा कंटेनर टर्मिनल होगा। इसकी लंबाई 1400 मीटर और गहराई 20 मीटर की होगी। कोलंबो पोर्ट हिंद महासागर में सबसे बड़ा और सबसे व्यस्त ट्रांस-शिपमेंट पोर्ट है। इसकी क्षमता को देखते हुए इसके विस्तार की जरूरत समझी गई। इस नए टर्मिनल की वार्षिक कार्गो हैंडलिंग क्षमता 32 लाख से अधिक होने की संभावना है।

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