देहरादून से मसूरी के बीच बनने जा रहा 3500 करोड़ का हाइवे, 2 लंबी सुरंगों से कटेगा पहाड़

Updated on 05-02-2026 12:26 PM
मसूरी: देश भर से मसूरी आने वालों के लिए घंटों का जाम, खड़ी चढ़ाइयों पर रेंगती गाड़ियां और बरसात में बंद हो जाने वाले रास्ते, ये सब अब बीते दिनों की बात हो सकती है। देहरादून से मसूरी के बीच हाइवे बनने जा रहा है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने 42 किमी लंबे दो-लेन हाईवे की स्वीकृति दे दी है। इस पर करीब 3500 करोड़ रुपये खर्च होंगे। यह हाईवे झाझरा से लेकर मसूरी के लाइब्रेरी चौक तक बनेगा। इसकी सबसे बड़ी खासियत होंगी दो लंबी सुरंगें, जो पहाड़ों के भीतर से होकर सफर को तेज, सुरक्षित और सुगम बनाएंगी।
नई परियोजना के तहत, जॉर्ज एवरेस्ट क्षेत्र के नीचे 2.9 किमी लंबी सुरंग बनाई जाएगी, जबकि दूसरी सुरंग मसूरी की पहाड़ियों में लगभग दो किमी लंबी होगी। इन सुरंगों के बनने से न केवल दूरी कम होगी, बल्कि तीखे मोड़ों और भूस्खलन प्रभावित इलाकों से भी निजात मिलेगी।


तीसरे विकल्‍प के रूप में उभरेगा ये हाइवे

फिलहाल देहरादून से मसूरी जाने के लिए मुख्य रूप से एक ही मार्ग इस्तेमाल होता है, जिस पर पर्यटन सीजन में हालात बेहद खराब हो जाते हैं। वैकल्पिक किमाड़ी मार्ग हर बारिश में क्षतिग्रस्त हो जाता है, जिससे कई-कई दिन यातायात पूरी तरह ठप रहता है। ऐसे में नया हाईवे तीसरे स्थायी विकल्प के रूप में उभरेगा।

पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा, स्थानीय लोगों को राहत

मसूरी हर साल लाखों पर्यटकों का स्वागत करती है, लेकिन सीमित सड़क क्षमता के कारण स्थानीय लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। स्कूल, अस्पताल और रोजमर्रा की आवाजाही तक प्रभावित होती है। नया राष्ट्रीय राजमार्ग बनने से पर्यटकों का दबाव बंटेगा, जिससे शहर के भीतर जाम की समस्या काफी हद तक कम होगी। साथ ही यह मार्ग चासकोट और खनिज नगर होते हुए एनएच-707ए (मसूरी कैंपटीफॉल मार्ग) से जुड़ेगा, जिससे आसपास के ग्रामीण इलाकों को भी बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी।


भौगोलिक सर्वे शुरू, मिट्टी और पहाड़ों की होगी गहन जांच

परियोजना की संवेदनशीलता को देखते हुए एनएचएआई ने वाडिया हिमालयी भू-विज्ञान संस्थान को भौगोलिक सर्वेक्षण की जिम्मेदारी सौंपी है। वैज्ञानिक मिट्टी की गुणवत्ता, पहाड़ों की संरचना और भूस्खलन की संभावनाओं का अध्ययन कर रिपोर्ट सौंपेंगे। सर्वेक्षण का कार्य शुरू हो चुका है।


क्‍या बोले परियोजना निदेशक

एनएचएआई के परियोजना निदेशक सौरभ सिंह ने बताया कि मसूरी-देहरादून के बीच बनने वाले नए राष्ट्रीय राजमार्ग के एलाइनमेंट को स्वीकृति मिल चुकी है। भौगोलिक सर्वे के बाद निर्माण की अगली प्रक्रिया शुरू की जाएगी।


‘क्वीन ऑफ हिल्स’ के लिए गेमचेंजर साबित होगा प्रोजेक्ट

अगर यह परियोजना तय समय पर पूरी होती है, तो यह न सिर्फ मसूरी के यातायात इतिहास में मील का पत्थर साबित होगी, बल्कि पर्यटन, आपदा प्रबंधन और क्षेत्रीय विकासकृतीनों के लिए गेमचेंजर होगी। सुरंगों से होकर गुजरता हाईवे पहाड़ों की सुंदरता को बरकरार रखते हुए आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर का उदाहरण बनेगा।

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