भारत पर डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ के खिलाफ अमेरिकी संसद में बगावत, सांसदों ने कांग्रेस में पेश किया टैक्स हटाने का प्रस्ताव

Updated on 13-12-2025 01:32 PM
वॉशिंगटन: भारत पर लगाए गये 50 प्रतिशत टैरिफ के खिलाफ अमेरिकी सांसद लामबंद होने लगे हैं। अमेरिकी संसद में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस नेशनल इमरजेंसी घोषणा को पलटने की कोशिश की गई है, जिसके तहत भारतीय उत्पादों पर टैरिफ बढ़ाकर 50 प्रतिशत तक कर दिया गया था। अमेरिकी सांसदों ने तर्क दिया कि ये टैरिफ गैर-कानूनी, नुकसानदायक हैं और अमेरिकी उपभोक्ता और कारोबारियों को बहुत ज्यादा नुकसान पहुंचा रहे हैं। शुक्रवार को इस प्रस्ताव को अमेरिकी संसद में पेश किया गया है और इसे पेश करने वाले सांसदों के नाम डेबोरा रॉस, मार्क वेसी और राजा कृष्णमूर्ति हैं।

इस प्रस्ताव को पेश करने का मकसद उस राष्ट्रीय आपातकालीन घोषणा को खत्म करना है, जिसके आधार पर भारत पर 50 प्रतिशत तक टैरिफ लगाए गए हैं। इन सांसदों का कहना है कि ट्रंप प्रशासन की तरफ से लगाए गए ये शुल्क न सिर्फ अवैध हैं, बल्कि अमेरिकी उपभोक्ताओं और कारोबारियों पर अतिरिक्त बोझ डाल रहे हैं और अमेरिका–भारत के मजबूत आर्थिक रिश्तों को नुकसान पहुंचा रहे हैं।
ट्रंप टैरिफ के खिलाफ अमेरिकी संसद में प्रस्ताव
अमेरिकी संसद में जो प्रस्ताव पेश किया गया है, उसमें खास तौर पर 27 अगस्त 2025 को भारत के ऊपर लगाए गए अतिरिक्त 25 प्रतिशत "सेकेंडरी टैरिफ" के खिलाफ है, जिसे ट्रंप ने भारत पर रूसी तेल खरीदने की वजह से लगाए थे। अंतरराष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्तियां अधिनियम (IEEPA) के तहत लगाए गए इन कदमों से कई भारतीय मूल के उत्पादों की आयात लागत अमेरिका में अचानक काफी ज्यादा बहुत बढ़ गई। सांसदों का तर्क है कि इन टैरिफ का असर सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा खामियाजा अमेरिकी कंपनियों, सप्लाई चेन और आम ग्राहकों को भुगतना पड़ रहा है, जिन्हें रोजमर्रा की जरूरतों के लिए ज्यादा कीमत चुकानी पड़ रही है।उत्तरी कैरोलाइना से सांसद डेबोरा रॉस ने कहा है कि उनके राज्य की अर्थव्यवस्था, भारत के साथ व्यापार, निवेश और भारतीय-अमेरिकी समुदाय के जरिए गहराई से जुड़ी हुई है। उन्होंने बताया कि भारतीय कंपनियों के अरबों डॉलर के निवेश और हजारों नौकरियां, दोनों देशों के रिश्तों पर निर्भर हैं, लेकिन टैरिफ ने उसपर गंभीर असर डाला है। वहीं टेक्सास के सांसद मार्क वीसी ने इन शुल्कों को "अमेरिकियों पर लगाया गया टैक्स" बताया है। उनके मुताबिक महंगाई से पहले ही जूझ रहे परिवारों के लिए ये टैरिफ हालात और मुश्किल बना रहे हैं। जबकि इलिनॉय से भारतीय मूल के सांसद राजा कृष्णमूर्ति ने भी चेतावनी दी है, कि ये कदम सप्लाई चेन को बाधित कर रहे हैं, अमेरिकी कामगारों को नुकसान पहुंचा रहे हैं और उपभोक्ताओं के खर्च बढ़ा रहे हैं।
सबसे खास बात ये है कि इस प्रस्ताव को द्विदलीय समर्थन हासिल हो रहे हैं। डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के कई सांसदों ने भी प्रस्ताव का समर्थन किया है। कई सांसदों का कहना है कि यह प्रस्ताव, कांग्रेस के उस संवैधानिक अधिकार को फिर से स्थापित करने की दिशा में उठाया गया कदम है, जिसके तहत व्यापार नीति पर अंतिम फैसला संसद का होना चाहिए।

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