
प्रदेश के सभी 14 कालेजों की बात करें तो 60 प्रतिशत सीटें रिक्त हैं। यह स्थिति दो चरण की काउंसलिंग के बाद है। इसमें भी 50 से ज्यादा सीटों के आवंटन की उम्मीद नहीं है। यही स्थिति रही तो आगे चलकर प्रदेश के कई डेंटल कालेज बंद होने की स्थिति में पहुंच जाएंगे। हर वर्ष 40 से 50 प्रतिशत सीटें रिक्त रहती थीं, लेकिन इस वर्ष 60 प्रतिशत सीटें नहीं भर पाई हैं।