
पाकिस्तान में सिर्फ दो साल बाद चैंपियंस ट्रॉफी होनी है। अगले एक साल में भारत को सिर्फ 6 ही वनडे खेलने हैं। ऐसे में रोहित को हटाककर किसी को कप्तान भी बनाया जाता है तो उसके वह बड़े टूर्नामेंट से पहले शायद उतना अनुभव हासिल नहीं कर पाए।
हार्दिक पंड्या वनडे में भारतीय टीम के उपकप्तान हैं। लेकिन हार्दिक के साथ फिटनेस की समस्या है। वर्ल्ड कप के बीच में ही वह चोटिल होकर बाहर हो गए। उनका वर्कलोड मैनेज करना पड़ता है। इसी वजह से उन्हें लंबे समय के लिए कप्तान नहीं बनाया जा सकता है।
भारतीय टीम में अभी कोई ऐसा नियमित खिलाड़ी नहीं दिखता जो कप्तान के लिए तैयार हो। श्रेयस अय्यर के पास जरूर आईपीएल और इंडिया ए की कप्तानी करने का अनुभव है। वह मुंबई की भी कप्तानी कर चुके हैं। ऋषभ पंत की वापसी पर कोई स्थिति साफ नहीं है। इसमें से किसी के पास भारत के लिए वनडे में कप्तानी करन का अनुभव नहीं है।
सबसे बड़ी बात है कि रोहित शर्मा का बल्ला बोल रहा है। कप्तानी पर सबसे ज्यादा सवाल तब उठते हैं जब कप्तान प्रदर्शन नहीं करता। रोहित बल्ले से टेम्पो सेट करते हैं। आने वाले बल्लेबाजों के लिए पावरप्ले में ही प्लेटफॉर्म बना दे रहे हैं। कप्तान बनने के बाद उन्होंने खेलने का तरीका बदला है और इससे टीम को फायदा होता भी दिख रहा है।