5 साल में खत्म होंगी 1.4 करोड़ नौकरियां, कहां सबसे ज्यादा खतरा और कहां हैं मौके, जानिए यहां

Updated on 01-05-2023 07:20 PM
नई दिल्ली : विनय दुनिया की दिग्गज कॉमर्स कंपनी में काम करता है। बेस्ट वर्क कल्चर और अच्छे पैकेज के बावजूद विनय इस समय डरा हुआ है। उसे डर है कि आने वाले वक्त में उसकी जॉब जा सकती है। क्योंकि अकाउंटिंग का काम अब ऑटोमेशन में जा सकता है। विनय जैसे ऐसे कई लोग हैं, जिन्हें अपने जॉब जाने का अंदेशा है। ग्लोबल जॉब मार्केट (Global Job Market) में संकट के बादल दिखाई दे रहे हैं। अगले 5 साल में 1.4 करोड़ नौकरियों (Jobs) पर खतरा मंडरा रहा है। इसका पहला कारण अर्थव्यवस्थाओं का कमजोर होना है। दूसरा कारण है कि कंपनियां AI जैसी तकनीकों को तेजी से अपना रही हैं। वर्ल्ड इकनॉमिक फोरम (World Economic Forum) से यह जानकारी सामने आई है। इसने रविवार को एक रिपोर्ट पब्लिश की थी। यह रिपोर्ट 800 से अधिक कंपनियों के सर्वे पर आधारित थी।


साल 2027 तक 8.30 करोड़ पद खत्म करेंगी कंपनियां


WEF ने सर्वे से यह पाया कि कंपनियां साल 2027 तक 69 मिलियन (6.90 करोड़) नई जॉब्स क्रिएट करेंगी। वहीं, वे 83 मिलियन (8.30 करोड़) पदों को खत्म करेंगी। इससे शुद्ध रूप से 14 मिलियन (1.40 करोड़) जॉब्स का नुकसान होगा। यह वर्तमान में रोजगार के 2 फीसदी के बराबर है। वर्ल्ड इकनॉमिक फोरम हर साल स्विट्जरलैंड के दावोस में वर्ल्ड लीडर्स की बैठक आयोजित करता है।

रिन्यूएबल एनर्जी सिस्टम से पैदा होंगी सबसे ज्यादा नौकरियां

ऐसे कई कारण हैं, जो आने वाले 5 वर्षों में लेबर मार्केट में उथल-पुथल मचाएंगे। दुनिया के रिन्यूएबल एनर्जी सिस्टम्स की तरफ जाने से काफी नौकरियां पैदा होंगी। यह जॉब्स पैदा करने का एक पावरफुल इंजन होगा। जबकि धीमी आर्थिक वृद्धि और महंगाई नुकसान पहुंचाएगी। इस बीच, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को डिप्लॉय करने की हड़बड़ी से सकारात्मक और नकारात्मक दोनों परिणाम सामने आएंगे।

इन नौकरियों में होगा इजाफा


कंपनियों को एआई टूल्स को लागू करने और उन्हें मैनेज करने के लिए नए वर्कर्स की जरूरत होगी। WEF के मुताबिक, मशीन लर्निंग स्पेशलिस्ट, साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स, डाटा एनालिस्ट और साइंटिस्ट्स की नौकरियां साल 2027 तक औसतन 30 फीसदी बढ़ने का अनुमान है।

ये नौकरियां हो सकती हैं खत्म


साथ ही एआई के बढ़ने से कई नौकरियों पर खतरा पैदा होगा। क्योंकि कुछ जगहों पर रोबोट इंसानों की जगह ले लेंगे। WEF के अनुसार, साल 2027 तक रिकॉर्ड-कीपिंग और प्रशासनिक नौकरियां 26 मिलियन (2.60 करोड़) कम हो सकती हैं। डाटा एंट्री क्लर्क्स और कार्यकारी सचिवों को सबसे ज्यादा नुकसान होने की आशंका है।

धीरे-धीरे बढ़ रहा ऑटोमेशन


चैटजीपीटी जैसे टूल्स को लेकर हाल की सनसनी के बीच इस दशक के शुरुआती हिस्से में ऑटोमेशन धीरे-धीरे बढ़ रहा है। WEF के सर्वे में शामिल संगठनों का अनुमान है कि वर्तमान में सभी बिजनस रिलेटेड कार्यों का 34 फीसदी मशीनों द्वारा किया जाता है। यह साल 2020 के आंकडें से थोड़ा ही ज्यादा है। हालांकि, जितना हम सोचते हैं, उससे काफी कम रफ्तार से ऑटोमेशन हुआ है। साल 2020 में कर्मचारी सोचते थे कि साल 2025 तक 47 फीसदी काम ऑटोमेटेड हो जाएगा। अब वे सोचते हैं कि साल 2027 तक यह आंकड़ा 42 फीसदी होगा।

कर्मचारी खुद को बदलें


इस बीच कंपनियां इस बात पर पुनर्विचार कर रही हैं कि उनके कर्मचारियों को किन स्किल्स की जरूरत है। कंपनियां अब कंप्यूटर प्रोग्रामिंग की तुलना में 'एआई टूल्स के कुशलतापूर्वक उपयोग करने की क्षमता' को महत्व दे रही हैं। कर्मचारियों को इन बदलावों के अनुसार खुद को बदलना होगा।

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