
मीजल्स (खसरा) के बढ़ते मामलों के बीच स्वास्थ्य विभाग के टीकाकरण अभियान में बड़ी गड़बड़ी का खुलासा हुआ है। जिस मीजल्स के इंदौर में 15 केस आए और एक बच्चे की मौत हुई, उसके टीकाकरण में विभाग ने पिछले साल टारगेट से अधिक यानी 104% लक्ष्य हासिल करने का दावा किया था। अब जब जिले सहित पूरे प्रदेश में बीमारी का प्रकोप बढ़ रहा है तो अफसर मान रहे हैं कि टीकाकरण कम हुआ है।
आंकड़ाें के मुताबिक पिछले साल अप्रैल से दिसंबर तक जिले के 61,887 बच्चों को टीके लगे, जो कुल टारगेट का 104% था। इंदौर व हातोद में तो 106% टीकाकरण बताया गया है। इसके अलावा सरकार मीजल्स-रूबेला (एमआर) टीकाकरण अभियान भी चलाती है, जिसमें छात्रों को भी टीका लगाया जाता है। इसके आंकड़े 80% बताए जा रहे हैं। सीएमएचओ कार्यालय के पास ऐसे इलाकों की सूची ही नहीं है, जहां टीकाकरण 80% से कम है।
जीरो-डोज बच्चों की संख्या 30 लाख
सबिन वैक्सीन इंस्टीट्यूट में ग्लोबल इम्यूनाइजेशन विभाग की प्रेसिडेंट अनुराधा गुप्ता के मुताबिक भारत में हर साल करीब ढाई करोड़ बच्चे जन्म लेते हैं। इनमें से 30 लाख बच्चे वैक्सीन की एक भी खुराक नहीं ले पाते हैं। यानी वे जीरो-डोज बच्चे होते हैं।
टीकाकरण कार्यक्रम का प्रचार-प्रसार होने के बावजूद भारत में जीरो-डोज बच्चों की संख्या सबसे ज्यादा है। इंटरनेशनल एसोसिएशन ऑफ बायोएथिक्स के पूर्व अध्यक्ष डॉ. अनंत भान कहते हैं कि बच्चों के नियमित टीकाकरण में बड़ी संख्या में हुई कमी की भरपाई करने के लिए लोगों में विश्वास पैदा करना जरूरी है।
"एमआर अभियान में हम सिर्फ ड्रॉपआउट बच्चों को ही ढूंढते हैं। सभी बच्चों को टीका नहीं लगाते।"
- डॉ. बीएस सैत्या, सीएमएचओ, इंदौर
"टारगेट से ज्यादा अचीवमेंट इसलिए आया क्योंकि जहां निजी अस्पताल अधिक हैं, वहां टीकाकरण बढ़ जाता है। अब प्रॉब्लम वाले एरिया की लिस्ट बना रहे हैं।"
-डॉ. तरुण गुप्ता, टीकाकरण अधिकारी